मथुरा। वर्तमान में शहर का हृदय स्थल कहा जाने वाला होलीगेट कभी प्राचीन मथुरा शहर का एक द्वार हुआ करता था। जिसका पुनर्निर्माण अंग्रेजी कलक्टर ब्रॅड फोर्ड हार्डिंग ने 1875 में कराया था। हार्डिंग के सम्मान में इसका नाम हार्डिंग गेट रखा गया, जो आगे चलकर सिटी गेट और फिर बाद में होली दरवाजा, होलीगेट के नाम से ही पुकारा गया।
होलीगेट आज शहर के बीच स्थित है। कहते हैं कि कभी शहर के बाहर खिंची दीवार का यह एक दरवाजा हुआ करता था। 1875 में अंग्रेजी कलक्टर ब्रॅड फोर्ड हार्डिंग ने इसका पुनर्निर्माण कराया था। नगर पालिका के इंजीनियर यूसुफ ने इसका वर्तमान स्वरूप का नक्शा तैयार किया था। इसके ऊपर क्यूपोला (इमारतों के शीर्ष पर बनने वाली छतरी नुमा गुम्मद) भी बनवाई।
हवादार छतरी, गोल, षटकोणीय या पंच कोणीय छतरी के निर्माण हुए। द्वार के अलावा अतिरिक्त निर्माणों पर 3493 का खर्च आया। बताते हैं कि सन 1875 में दो दुकानों सहित इसके पूर्ण निर्माण पर 13731 बजट खर्च हुआ। होलीगेट के पत्थरों पर कालापन आ गया है। इनकी सफाई के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास भी किए गए हैं। नगर पालिका प्रशासन ने इसे नो विज्ञापन जोन भी घोषित किया था, जो नगर निगम ने भी बरकरार रखा है। तीन साल पहले इसकी मरम्मत भी की गई है।