मथुरा। अफसर बदले और नाम बदला, लेकिन काम का तौर तरीका नहीं बदला है। नगर निगम में कामकाज वही नगर पालिका के पैटर्न पर ही चला रहा है। पिछले दो साल से बगैर टेंडर के ही एसटीपी और नलकूप संचालन के ठेका जारी हैं। इनका भारी भरकम भुगतान भी बगैर किसी आपत्ति के हो रहा है।
मथुरा-वृंदावन अब नगर निगम बन गया है। यहां आईएएस, पीसीएस और चीफ इंजीनियर काम देख रहे हैं। लेकिन यहां काम का तरीका वहीं नगर पालिका वाला है। मथुरा नगर पालिका के रहते एसटीपी संचालन के ठेका की वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताएं सुर्खियों में रही थी। प्रशासनिक स्तर पर हुई जांच के बाद यह मामला शासन तक पहुंच गया था।नगर निगम बनने के बाद भी एसटीपी ठेका संचालन में कोई बदलाव नहीं आया है। पिछले दो साल से 1.8 करोड़ प्रतिवर्ष के भुगतान वाले इस एसटीपी संचालन ठेका को टेंडर से नहीं उठाया जा रहा है। यही स्थिति नलकूप संचालन के ठेका की है। 1.10 करोड़ वाले इस ठेका के लिए टेंडर नहीं हुआ है। वही पुराने ठेकेदार पर नगर निगम के अफसर मेहरबान हैं।
कमिश्नर करेंगे नगर आयुक्त पर आरोपों की जांच
मथुरा। मथुरा-वृंदावन नगर निगम में बजट की बगैर स्वीकृति के ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के भुगतान पर निर्वाचित पार्षद राजेश सिंह पिंटू द्वारा की गई शिकायत पर कमिश्नर जांच करेंगे। मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज शिकायत में नगर आयुक्त और लेखाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए विशेष आडिट की मांग की है। पार्षद राजेश सिंह ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 का बजट शासन या मंडलायुक्त से स्वीकृत कराए बगैर ही करोड़ों रुपये के भुगतान किए गए हैं, जबकि निगम एक्ट 1959 के तहत बजट की स्वीकृति बोर्ड या फिर शासन से ली जानी आवश्यक है, लेकिन नगर आयुक्त और लेखाधिकारी ने ऐसा नहीं किया है। शासन की बगैर स्वीकृति के एसटीपी, नलकूपों का ठेका उठाए बगैर भुगतान किया गया है।