कासगंज। कुष्ठ रोग नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से भले ही कार्यक्रम चलाया जा रहा हो। हालांकि इसे लेकर जिले की स्थिति देखी जाए तो गंभीरता का अभाव लगता है। रोग पर नियंत्रण के लिए बना विभाग खुद बीमार प्रतीत होता है। इसमें कुल 40 में से मात्र छह पद ही भरे हैं। ऐसी स्थिति के कारण जनपद में इस बीमारी पर काबू नहीं होने से लगातार मरीज सामने आ रहे हैं। जनवरी माह में ही 16 नए मरीज मिल हैं।जिले को सृजित हुए डेढ़ दशक से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन शासन अभी तक कुष्ठ रोगियों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं कर सका है। विभाग के नाम पर मात्र खानापूर्ति ही की जा रही है। जिले में सोरों के लहरा में कुष्ठ आश्रम संचालित है। यहां 40 कुष्ठ रोगी रह रहे हैं। इसके अलावा कछला गंगा घाट पर भी एक कुष्ठ आश्रम बना हुआ है जो बदायूं जनपद की सीमा में आता है। जनपद में जिला कुष्ठ रोग अधिकारी सहित 40 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से मात्र छह पद ही भरे हैं। सबसे खराब हालात नॉन मेडिकल असिस्टेंट के पद की है। जिले में स्वीकृत 29 पदों में से मात्र एक ही पद भरा हुआ है। सुपरवाइजर के पद भी रिक्त चल रहे हैं। जिससे जनपद में कुष्ठ रोग पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग पा रहा।