मथुरा। कर्मचारियों की कमी के चलते जनपद की बिजली आपूर्ति की व्यवस्था 650 संविदा कर्मियों पर टिकी है, लेकिन लाइन सही करने के दौरान अंग गंवा बैठे संविदा कर्मियों की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। इनको न तो श्रम विभाग से कोई राहत दी गई और न दुर्घटना बीमा आदि का लाभ दिया गया। अपनी मांगों के लिए विद्युत संविदा मजदूर संगठन ने गुरुवार को कैंट बिजलीघर पर धरना दिया
संगठन के जिला संयोजक गणेश तोमर, अध्यक्ष चकलेश्वर पांडेय, महामंत्री विजय शर्मा, चरन सिंह, बच्चू सिंह, लाल सिंह भगवान सिंह, राजकुमार ने कहा कि वे हर वक्त जान पर खेलकर बिजली आपूर्ति सुचारु रखने का काम करते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को कोई अधिकारी नहीं सुन रहा। कहा कि श्रम विभाग, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य आदि को लेकर भी पीड़ित परिवार को कोई राहत नहीं दी जाती। आए दिन बिजली हादसों में संविदा कर्मियों की मौत हो जाने के बाद भी उनके परिवारीजनों के हित में नौकरी, मुआवजा आदि कोई योजना नहीं है। अपनी मांगों को लेकर संविदा कर्मियों ने एसई देहात विनोद कुमार गंगवार, एसई शहर राघवेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा।
कैंट स्थित बिजलीघर आए गांव कारब के सतीश बलदेव के पचावर बिजलीघर से 21 जनवरी 2018 को सरकंड खेड़ा फीडर पर ट्रांसफार्मर बदलने गए थे। काम के दौरान एसएसओ द्वारा लाइन चालू कर देने के कारण करंट से हाथ झुलस गया। बाद में हाथ काटना पड़ा। वहीं नगला राय सिंह बलदेव निवासी जितेंद्र सिंह को 2012 में बलदेव फीडर पर तार जोड़ने के दौरान आए करंट से हाथ गंवाना पड़ा।
गांव कासिमपुर बलदेव के सुखवीर 14 जून 2017 को दौलतपुर बलदेव नरहौली फीडर पर तार जोड़ रहे थे। इसी दौरान आए करंट से हाथ जल गया। बाद में हाथ काटना पड़ा। बताया कि घटना के बाद अब तक न तो श्रम विभाग से कोई राहत दी गई और न ही दुर्घटना बीमा आदि का लाभ दिया। पीड़ित सतीश, सुखवीर व जितेंद्र ने बताया कि राहत के लिए वे हर दरवाजे पर गए, लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की।