लखनऊ। सैय्यद वारिस अली शाह, शाहमीना शाह और खम्मनपीर बाबा सूफी परंपरा से जुड़े संतों के ये चंद नाम हैं, इनकी शिक्षाओं का जोर कुछ ऐसा था कि, मजहबों और फिरकों की दीवारें टूट गईं। उनके दर पर पहुंचने वालों की न कोई जात और न धर्म। इसी सूफी परंपरा से दो-चार कराती है मशहूर फिल्मकार मुजफ्फर अली की किताब ‘ए लीफ टर्नस येलो’। इस पुस्तक का विमोचन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को गोमती नगर के एक होटल में किया। सीएम ने कहा कि, मुजफ्फर अली और उनके साथ प्रदेश और अवध की परंपराओं को जिंदा रखने के लिए बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। इसमें उनको सरकार से जितनी भी मदद की जरूरत होगी, वह की जाएगी। समारोह का आयोजन रूमी संस्था के बैनर तले किया गया। बतौर चीफ गेस्ट सीएम ने कहा कि न केवल अवध बल्कि जौनपुर, प्रतापगढ़, मथुरा, आगरा और वृंदावन में भी सूफियाना तहजीब को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिसके लिए सरकार हाजिर है। इससे पहले मुजफ्फर अली ने अपनी इस किताब के बारे में बताया कि, उनकी पूरी जिंदगी का निचोड़ अंग्रेजी की इस किताब में है। यह बात दीगर है कि, इसको पूरा करने में दो साल लगे। अवध की सूफियाना संस्कृति ने किस तरह से संप्रदायों को जोड़े रखा, उसका पूरा सिजरा किताब में मिलेगा। समारोह के दौरान अंकारा से आईं सूफी कल्चर की विशेषज्ञ स्मिता सदल ने इस संस्कृति की विशेषताओं से सभी को दो-चार कराया। पद्मश्री प्रो. मंसूर हसन ने इस किताब में उल्लेखित कुछ हिस्सों को पढ़ा। उनके अलावा यहां आए अनेक लोगों ने किताब की खासियतों को दोहराया। मुंबई से आए करन आनंद ने अवधी सूफी कल्चर को टूरिज्म से जोड़ने का ब्ल्यू प्रिंट तैयार करने की बात कही। कार्यक्रम में मशहूर पार्श्व गायिका ईला अरुण, सांसद संजय सिंह, मीरा अली, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, पूर्व क्रिकेटर ज्योति यादव, जयंथ कृष्णा मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन चंद्रप्रकाश ने किया।