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जल्द लागू होगा लाइब्रेरी एक्ट

Sun, 09 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। वैश्वीकरण के इस दौर में व्यक्तिगत स्तर की उपलब्धि को बचाने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) एक सुरक्षा कवच का काम करता है। लाइब्रेरियों को डिजिटल बनाने के इस दौर में कॉपीराइट एक्ट के दुरुपयोग को रोकने में आईपीआर की भूमिका और अहम हो गई है। ये विचार विज्ञान व प्रौद्योगिक राज्यमंत्री प्रो. अभिषेक मिश्रा ने शनिवार को रखे। वे डॉ. राममनोहर लोहिया विधि विवि परिसर में डिजिटल लाइब्रेरियों के बदलाव विषयक सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि ठंडे बस्ते में पड़े लाइब्रेरी एक्ट को जल्द ही प्रदेश में लागू करवाने का प्रयास किया जाएगा। इससे बौद्धिक ज्ञान के सबसे बड़े स्रोत के तौर पर संचालित पब्लिक लाइब्रेरियों में बेहतर संसाधन उपलब्ध कराकर उनकी बदहाल स्थिति को जनोपयोगी बनाया जा सकेगा। प्रो. मिश्रा ने विश्वविद्यालयों व तकनीकी शैक्षिक संस्थाओं के स्तर पर संचालित लाइब्रेरियों में वहीं के मेधावियों के शोध कार्य व अन्य बौद्धिक उपलब्धियों को बतौर पठन सामग्री शामिल करने की जरूरत भी जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि हर विवि अपने स्तर पर ऐसे शोध कार्यों की प्रिटिंग कराने के लिए खुद का पब्लिशिंग हाउस चलाए। इससे न केवल उसे बौद्धिक संपदा अधिकार क्षेत्र में लाते हुए सुरक्षित बनाया जा सकेगा बल्कि संबंधित विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान के लाइब्रेरी को भी नई जानकारी की शैक्षिक सामग्री से अपडेट करने में मदद मिलेगी। प्रो. मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई में हमारी सरकार भी ग्राम पंचायतों को वाई-फाई की सुविधा से जोड़ते हुए हर मेधावी युवा के हाथ में लैपटॉप देकर डिजिटल लाइब्रेरी के बेहतर इस्तेमाल का रास्ता खोल रही है। जरूरत इस दिशा में युवाओं को जागरूक कर प्रशिक्षित करने की है। इससे पूर्व सेमिनार में आए अतिथियों का विधि विवि के कुलपति प्रो. गुरुदीप सिंह ने स्वागत किया और सेमिनार के विषय सामग्री के बारे में लाइब्रेरियन डॉ. मनीष बाजपेयी ने सारगर्भित जानकारी दी। उद्घाटन सत्र को बीएचयू से आए लॉ फैकल्टी के प्रो. बीएन पांडेय व उस्मानिया यूनिवर्सिटी हैदराबाद से आए लाइब्रेरी व इन्फॉर्मेशन साइंस विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एन लक्ष्मन राव सहित कई अन्य प्रमुख वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस दौरान स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
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