लखनऊ। आशियाना में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रोबेशनरी ऑफिसर पद की परीक्षा देते धरे गए सॉल्वर के तार बड़े गैंग से जुड़े हैं। इसकी जड़ बुंदेलखंड में होने का शक है। एसएसपी ने आशियाना थाने में दर्ज मुकदमे की तफ्तीश क्राइम ब्रांच को सौंपते हुए पूरा गिरोह पकड़ने के आदेश दिए हैं। एसएसपी जे रविंदर गौड ने बताया कि आशियाना के सेक्टर-3 स्थित पॉयनियर मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज में बैंक पीओ की परीक्षा देते पकड़े गए सॉल्वर मयंक द्विवेदी ने पूछताछ में तमाम राज उगले हैं। सॉल्वरों का एक बड़ा गैंग सक्रिय है। इसकी जड़ बुंदेलखंड में होने की उम्मीद है। गिरोह में कद्दावर लोगों के शामिल होने की जानकारी मिली है। यह भी पता चला है कि अच्छी नौकरी कर रहे कई टॉपर्स इस गिरोह के लिए काम कर रहे हैं। आमतौर पर प्रतियोगी परीक्षाएं अवकाश के दिन होती हैं। ऐसे में सरकारी नौकरी कर रहे सॉल्वर छुट्टी के दिन मोटी कमाई के लिए तैयार रहते हैं। सॉल्वरों के बड़े गैंग का पता चलने पर आशियाना थाने में रविवार को मयंक द्विवेदी के खिलाफ दर्ज मुकदमे की तफ्तीश क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। एसपी क्राइम रवींद्र कुमार सिंह को गिरोह की जड़ तक पहुंचकर धरपकड़ के आदेश दिए गए हैं। पारीछा पॉवर प्लांट में कार्यरत इंजीनियर मयंक द्विवेदी से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर कई लोगों का ब्योरा एकत्र किया जा रहा है। कई मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाल कर सुराग लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इस गिरोह का नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला है। गिरोह का एक धड़ा प्रतियोगी परीक्षा के आवेदकों से संपर्क करके सौदा तय करता है और दूसरा धड़ा टॉपर्स को जाल में फंसाकर सॉल्वर तैयार करता है। सरगना व उसके करीबी लोगों के पास सॉल्वर्स का पूरा ब्योरा रहता है। किस प्रतियोगी परीक्षा के लिए कौन सॉल्वर ठीक रहेगा और उससे कितने में डील करनी है? यह कार्य सरगना करता है। सॉल्वर को तय रकम देने के साथ परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने व वापस ले जाने की जिम्मेदारी गिरोह की होती है।