लखनऊ। हसनगंज कोतवाली में युवक की पीटकर हत्या व साजिश रचने के आरोपी इंस्पेक्टर समेत सातों पुलिसकर्मियों ने आखिरकार शनिवार को पुलिस लाइन में अपनी आमद दर्ज कराई। दूसरी तरफ मामले की तफ्तीश कर रहे इंस्पेक्टर महानगर ने मुकदमे के वादी के बयान दर्ज किए और पड़ोसियों से बातचीत की। हालांकि, हिरासत में मौत के चौथे दिन भी मजिस्ट्रेटी जांच शुरू नहीं हो सकी है। आरआई कुलभूषण ओझा ने बताया कि हसनगंज कोतवाली से निलंबित इंस्पेक्टर मोहम्मद जावेद खान, सब इंस्पेक्टर शिवाकांत त्रिपाठी, बृजेश कुमार, हेडकांस्टेबल राकेश कुमार, कांस्टेबल मुनेश्वर बख्श, रामकृपाल व रोहित कुमार ने पुलिस लाइन में अपनी आमद दर्ज करा दी है। सातों पुलिसकर्मियों को बुधवार रात पुलिस हिरासत में वीरेंद्र मिश्रा नामक युवक की मौत के बाद एसएसपी ने निलंबित कर दिया था। वीरेंद्र के भाई जितेंद्र ने उनके खिलाफ बंधक बनाकर हत्या व साजिश रचने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसकी तफ्तीश इंस्पेक्टर महानगर वीर सिंह कर रहे हैं। विवेचक वीर सिंह ने मृतक के घर जाकर उसके भाई जितेंद्र मिश्रा का बयान लिया। हालांकि, मां लाभेश्वरी देवी की हालत ठीक न होने के कारण उनके बयान नहीं लिए जा सके हैं। इसके अलावा उसके पड़ोसियों से भी बातचीत की। सबूत जुटाने के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच में फोरेंसिक टीम का सहयोग न लेने के सवाल पर इंस्पेक्टर वीर सिंह ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह स्पष्ट हो चुकी है। चाकू रखने के जुर्म में गिरफ्तार वीरेंद्र मिश्रा को उपलब्ध कराया गया कंबल व फांसी लगाने में इस्तेमाल कंबल का टुकड़ा कब्जे में लिया जा चुका है। उधर, पुलिस हिरासत में युवक की मौत के चौथे दिन भी मजिस्ट्रेटी जांच शुरू नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस की नजरें मजिस्ट्रेटी जांच पर टिकी हैं। यही वजह है कि पुलिस ने वीरेंद्र के पोस्टमार्टम में पिटाई व फांसी लगाने की पुष्टि के बाद भी मामले को खुदकुशी के लिए प्रताड़ना व मजबूर करने की धारा में नहीं बदला है। बंधक बनाकर हत्या व साजिश रचने के मामले में ही तफ्तीश चल रही है। वीरेंद्र का आपराधिक इतिहास भी एकत्र कर लिया गया है। उसे पहले भी फर्जी फंसाने के आरोपों की जांच चल रही है।