लखनऊ। राजधानी में यूपी बोर्ड परीक्षा में इस बार बिल्कुल नकल नहीं हो रही है। ये हम नहीं बल्कि नकल रोकने के लिए गठित सचल दस्ते बता रहे हैं। असल में राजधानी में नकलचियों को पकड़ने के लिए आठ सचल दस्ते बनाए गए हैं। ये पिछले तीन दिनों से लगातार परीक्षा केंद्रों के सघन जांच का दावा कर रहे हैं लेकिन उन्हें एक भी नकलची नहीं मिला। जानकारों की मानें तो नकल कराने वालों की पहुंच इतनी ऊंची है कि कोई उन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। माल, मलिहाबाद जैसे क्षेत्रों या शिक्षा माफिया की भाषा में कहें तो ग्रीन बेल्ट में धड़ल्ले से नकल चल रही है। नकल कराने के लिए परीक्षार्थियों से प्रति विषय 200 से 500 रुपए वसूले जा रहे हैं। इन्हें बकायदा बोर्ड पर लिखकर साइलेंट नकल कराई जा रही है लेकिन इन स्कूलों की पहुंच के कारण इन पर कोई भी हाथ नहीं डाल रहा है। नकल कराने के लिए माफिया किसी का भी नाम लेने से नहीं चूकते हैं। राजधानी के चिनहट के एक परीक्षा केंद्र में खुद को सत्ता पक्ष का करीब बताने वाला प्रबंधक जमकर नकल करा रहा है। यहां के परीक्षार्थियों की मानें तो केंद्र में नकल के लिए किताबों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन कोई भी सचल दस्ता नहीं आया। उधर, डीआईओएस भी इससे इत्तफाक नहीं रखते हैं। उन्होंने बताया कि सचल दस्ते लगातार काम कर रहे हैं। हर केंद्र की जांच हो रही है लेकिन अभी तक कोई नकलची नहीं पकड़ाया है।