लखनऊ। राजधानी में नजूल और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के वैध पट्टेदारों केलिए फ्री होल्ड कराने की प्रक्रिया लंबी हो गई है। नवागत अपर सचिव सीमा सिंह ने आवेदन के साथ संपत्ति का लीज प्लान लगाना और उसे दो अतिरिक्त अनुभागों से सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे एलडीए अवैध निर्माण और कानूनी पचड़ों में फंसने से बचा रहेगा। राजधानी में एलडीए नजूल भूमि और अग्रेजों के समय के इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की भूमि का पूर्ण मालिकाना हक देने के लिए फ्री होल्ड की प्रक्रिया संचालित कराता है। अभी तक इसमें लीज या कब्जेदारी का प्रमाण देना होता है। इसके बाद में तमाम प्रक्रियाओं से गुजरते हुए डीएम सर्किल रेट के हिसाब से 12 फीसदी शुल्क जमा करके जमीन का फ्री होल्ड आवेदक के नाम कर दिया जाता था। फ्री होल्ड होने के बाद इस भूमि का कब्जेदार या पट्टाधारी शत-प्रतिशत मालिक हो जाता है। इस पर वह लैंडयूज और मानकों को पूरा करते हुए कोई भी निर्माण करने के लिए स्वतंत्र हो जाता है। लेकिन, अब अपर सचिव सीमा सिंह की ओर से आदेश किया गया है कि फ्री होल्ड के प्रत्येक आवेदन के साथ लीज प्लान भी लगेगा और इसका सत्यापन इंजीनियरिंग व टाउन प्लानिंग विभाग करेगा। कई बार अवैध निर्माण, नाले या अन्य सरकारी संसाधनों पर कब्जा और दूसरे की जमीन हथियाने की कोशिश होती है, इसलिए अब लीज प्लान लगाना और उसका सत्यापन आवश्यक कर दिया गया है। यानी आवेदन की फाइल संपत्ति विभाग, नजूल, अर्जन, तहसील आदि विभागों के साथ अब दो अन्य अनुभागों में भी जाएगी, जिससे यह प्रक्रिया खासी लंबी हो जाएगी। राजधानी में नजूल और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट से जुड़े हजारों आवेदन फ्री होल्ड के लिए लंबित हैं।