लखनऊ। प्रदेश के हज यात्रियों की मेडिकल जांच पर सवाल उठने लगे हैं। मेडिकल समस्या को लेकर कई यात्रियों को अपनी यात्रा तिथि बदलने की दरख्वास्त देने पड़ी है, जबकि कई की एयरपोर्ट पर पहुंच कर वापसी तक हो चुकी है। इसके बावजूद राज्य हज कमेटी पर कोई फर्क नहीं पड़ा है और वह सेंट्रल हज कमेटी पर आरोप लगा रही है। उधर, सेंट्रल हज कमेटी ने राज्य हज कमेटी को दोषी बताया है। हज यात्रा आवेदन की शुरुआत में ही सेंट्रल हज कमेटी ऑफ इंडिया ने साफ निर्देश दिए थे कि मेडिकल से संबंधित किसी तरह की खामी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही ऐसे हज आवेदकों की जमा की गई धनराशि भी वापस नहीं की जाएगी। इसके बावजूद राज्य हज कमेटी ने ऐसे आवेदकों का भी आवेदन स्वीकार कर लिया, जिनमें मनोरोगी तक शामिल हैं। अब जब हज यात्रियों को परेशानी हो रही है तो राज्य हज कमेटी सीधे इसे सेंट्रल हज कमेटी मुंबई की गलती मान रही है। राज्य हज कमेटी का कहना है कि यहां से आवेदन भेजे गए थे, जिसके बाद जांच की जिम्मेदारी सेंट्रल हज कमेटी मुंबई की होती है। उधर, सेंट्रल हज कमेटी के अकबर शेख ने राज्य हज कमेटी को दोषी बताया है। उनका कहना है कि राज्य हज कमेटी मनोरोगी का आवेदन उसके मेडिकल फिटनेस के साथ दे रही है। ऐसे में सेंट्रल हज कमेटी कैसे पता लगा सकेगी। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच दर्जन भर से ज्यादा हज यात्रियों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।