Indian Clean Air Summit 2024: हर साल सितंबर महीने के आखिरी सप्ताह, अक्तूबर और नवंबर महीने में पंजाब और हरियाणा में बड़े स्तर पर पराली को जलाया जाता है। पराली जलाए जाने की वजह से दिल्ली और आसपास के राज्यों की वायु गुणवत्ता काफी खराब हो जाती है। इसका बुरा असर लोगों के स्वास्थ्य पर तो पड़ता ही है साथ में कृषि भूमि की पैदावार भी बुरी तरह से प्रभावित होती है। सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (CSTEP Research Based Think Tank) ने इस समस्या पर एक गहन अध्ययन किया है। इस अध्ययन में जो कई महत्वपूर्ण बातें सामने निकलकर आई हैं उसे निती संक्षेप (Stubble Management: Harnessing Ex-Situ Options and Market Mechanisms) में संकलित किया गया है।
CSTEP द्वारा बेंगलुरु में आयोजित इंडियन क्लीन एयर समिट 2024 में इस पॉलिसी ब्रीफ को लॉन्च किया गया। इस दौरान स्वागता डे (Policy Specialist at CSTEP) ने बताया कि हम ऐसी योजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिनकी मदद से पराली का फायदेमंद ढंग से उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा हमें एक ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रभावी बाजार और एक नियामक ढांचा बनाने की जरूरत है, जो मिलकर पराली के उपयोग के लिए मजबूत तरीके तैयार करने में मदद करे।
Indian Clean Air Summit 2024
- फोटो : CSTEP
इंडियन क्लीन एयर समिट 2024 में पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमेन आदर्श पाल विज ने पंजाब में पराली प्रबंधन को लेकर कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने बताया कि पराली का ठीक ढंग से प्रबंधन किया जा सके इसको लेकर सरकार सीआरएम (Crop Residue Management) स्कीम पर काम कर रही है। पराली के प्रबंधन के लिए सरकार ने दो तरीके निकाले हैं इन सीटू और एक्स सीटू।
Indian Clean Air Summit 2024
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इन सीटू के अंतर्गत सुपर सीडर, हैप्पी सीडर कई तरह की मशीनरी किसानों को दी जा रही है। इन मशीनों की सहायता से किसान पराली को जलाने की बजाए उसको मिट्टी में मिलाकर मिट्टी की ऊर्वारक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए सरकार किसानों को सब्सिडी भी मुहैया करा रही है।
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वहीं पराली प्रबंधन के लिए एक्स सीटू विधि के अंतर्गत सरकार इंडस्ट्रीज को यह सुविधा प्रदान कर रही है कि वह खेतों में पड़े पाराली को बड़े स्तर पर इकट्ठा करके बॉयलर में ईंधन के रूप में उपयोग करे। इससे बिजली बनाने और कई दूसरे जरूरी कार्यों को करने में मदद मिलेगी।
अमर उजाला के साथ खास बात चीत करते समय आदर्श पाल विज ने यह भी बताया कि पराली प्रबंधन की इन सीटू विधि के अंतर्गत करीब 12 मिलियन टन पराली प्रबंधन किया जा रहा है। वहीं एक्स सीटू विधि के तहत करीब 8 मिलियन टन पराली का प्रबंधन किया जा रहा है। इन सीटू और एक्स सीटू इन दोनों विधियों से कुल मिलाकर राज्य में करीब 20 मिलियन टन पराली प्रबंधन करने में मदद मिल रही है। योजना के अंतर्गत पंजाब सरकार ने आईखेत पोर्टल बना रखा है, जिसके अंतर्गत सीआरएम मशीनों को खरीदने के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है। यह योजना अगर प्रभावी रूप से काम करती है तो सर्दियों के सीजन में पराली जलाने की वजह से दिल्ली और आसपास के राज्यों में होने वाले वायु प्रदूषण से कुछ राहत जरूर मिल सकती है।