मिसाइल एक तरह का ऑटोमेटेड वेपन है। इसमें चार मुख्य हिस्से होते हैं। इसमें प्रपल्शन सिस्टम, गाइडेंस सिस्टम, कंट्रोल सिस्टम और वारहेड होता है।
प्रपल्शन सिस्टम
प्रपल्शन सिस्टम से मिसाइल को गति मिलती है। इसमें रॉकेट मोटर या जेट इंजन को उपयोग में लाया जाता है, जो कि मिसाइल को उसके टारगेट तक ले जाने का काम करता है।
गाइडेंस सिस्टम
यह सिस्टम मिसाइल को रास्ता दिखाने का काम करता है ताकि वह सटीक ढंग से अपने लक्ष्य तक पहुंच सके। यह सिस्टम मिसाइल की सटीकता का मूल आधार होता है।
कंट्रोल सिस्टम
यह मिसाइल की दिशा, ऊंचाई और रफ्तार को नियंत्रित करने का काम करता है। इससे मिसाइल को अपने लक्ष्य को भेदने में मदद मिलती है।
वारहेड
इसका काम टारगेट को नुकसान पहुंचाना होता है। इसमें टारगेट को नुकसान पहुंचाने के लिए विस्फोटक होते हैं।
मिसाइल में उपयोग होने वाले गाइडेंस सिस्टम की काफी उपयोगिता होती है क्योंकि यही सिस्टम मिसाइल को उसके टारगेट तक सटीकता से पहुंचाता है। गाइडेंस सिस्टम पांच तरह के हो सकते हैं।
- इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम
- जीपीएस बेस्ड गाइडेंस
- एक्टिव रडार होमिंग
- पैसिव होमिंग
- लेजर गाइडेंस
एक्टिव रडार होमिंग
इस गाइडेंस सिस्टम का उपयोग हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों में किया जाता है। इसमें मिसाइल खुद रडार सिग्नल भेजती है इसके बाद टारगेट से जो सिग्नल टकराकर लौटता है उसे पकड़ती है और उस पर सटीक हमला करती है।
पैसिव होमिंग
इसमें मिसाइल खुद कोई सिग्नल नहीं भेजती है बल्कि टारगेट से जो गर्मी या रेडियो सिग्नल निकलकर आ रहा है उसको निशाना बनाती है। इंफ्रारेड गाइडेड मिसाइल, पैसिव होमिंग सिस्टम पर ही काम करती है। इसका इस्तेमाल कम दूरी की मिसाइलों में किया जाता है।
लेजर गाइडेंस
इसमें जो टारगेट होता है उस पर लेजर बीम डाली जाती है। इसके बाद मिसाइल इस बीम को फॉलो करते हुए टारगेट पर हमला करती है।