फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Operation Sindoor: मिसाइल कैसे अपने टारगेट पर सटीक ढंग से करती है हमला? जानिए क्या है इसके पीछे की टेक्नोलॉजी

Wed, 07 May 2025 02:27 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How Missiles Hit Targets with Pinpoint Accuracy: आखिर मिसाइलें कैसे अपने टारगेट पर सटीक ढंग से हमला करती हैं? इसके पीछे की टेक्नोलॉजी क्या है, जो इन्हें सीधे लक्ष्य तक पहुंचाती है? आज इस खबर के माध्यम से हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। 
विज्ञापन
ऑपरेशन सिंदूर - फोटो : AdobeStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

How Missiles Hit Targets with Pinpoint Accuracy: पहलगाम में हुए वीभत्स आतंकी हमले का करारा जवाब देते हुए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों (बहावलपुर, मुरीदके, चक अमरू, सियालकोट, भीमबेर, गुलपुर, कोटली, बाघ और मुजफ्फराबाद) पर सटकी मिसाइल हमले किए हैं। हमले में दुश्मनों के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। हमला आतंकी जड़ों को हिला देने वाला है। मिसाइलों की सटीकता इतनी जबरदस्त थी कि हर निशाना सीधे आतंकी ढांचों पर लगा। 

विज्ञापन


अब सवाल ये है कि आखिर मिसाइलें कैसे अपने टारगेट पर सटीक ढंग से हमला करती हैं? इसके पीछे की टेक्नोलॉजी क्या है, जो इन्हें सीधे लक्ष्य तक पहुंचाती है? आज इस खबर के माध्यम से हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। 

मिसाइल एक तरह का ऑटोमेटेड वेपन है। इसमें चार मुख्य हिस्से होते हैं। इसमें प्रपल्शन सिस्टम, गाइडेंस सिस्टम, कंट्रोल सिस्टम और वारहेड होता है। 

प्रपल्शन सिस्टम

प्रपल्शन सिस्टम से मिसाइल को गति मिलती है। इसमें रॉकेट मोटर या जेट इंजन को उपयोग में लाया जाता है, जो कि मिसाइल को उसके टारगेट तक ले जाने का काम करता है। 

गाइडेंस सिस्टम

यह सिस्टम मिसाइल को रास्ता दिखाने का काम करता है ताकि वह सटीक ढंग से अपने लक्ष्य तक पहुंच सके। यह सिस्टम मिसाइल की सटीकता का मूल आधार होता है। 

कंट्रोल सिस्टम

यह मिसाइल की दिशा, ऊंचाई और रफ्तार को नियंत्रित करने का काम करता है। इससे मिसाइल को अपने लक्ष्य को भेदने में मदद मिलती है। 

वारहेड

इसका काम टारगेट को नुकसान पहुंचाना होता है। इसमें टारगेट को नुकसान पहुंचाने के लिए विस्फोटक होते हैं। 

मिसाइल में उपयोग होने वाले गाइडेंस सिस्टम की काफी उपयोगिता होती है क्योंकि यही सिस्टम मिसाइल को उसके टारगेट तक सटीकता से पहुंचाता है। गाइडेंस सिस्टम पांच तरह के हो सकते हैं। 
 
  • इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम
  • जीपीएस बेस्ड गाइडेंस
  • एक्टिव रडार होमिंग
  • पैसिव होमिंग
  • लेजर गाइडेंस

इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम

यह सिस्टम मिसाइल में लगे जायरोस्कोप या एक्सेलेरोमीटर के जरिए काम करता है। इससे यह तय किया जाता है कि मिसाइल की रफ्तार, टारगेट से वह कितना दूर है और दिशा क्या रहेगी। 

जीपीएस बेस्ड गाइडेंस 

जीपीएस बेस्ड गाइडेंस सिस्टम में मिसाइलों में जीपीएस रिसीवर को लगाया जाता है। यह सैटेलाइट्स से जो सिग्नल मिलता है उसकी मदद से लोकेशन को ट्रैक करने का काम करता है। लंबी दूरी की क्रूज या बैलिस्टिक मिसाइलों में इसका अधिक उपयोग किया जाता है। 
विज्ञापन

एक्टिव रडार होमिंग 

इस गाइडेंस सिस्टम का उपयोग हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों में किया जाता है। इसमें मिसाइल खुद रडार सिग्नल भेजती है इसके बाद टारगेट से जो सिग्नल टकराकर लौटता है उसे पकड़ती है और उस पर सटीक हमला करती है। 

पैसिव होमिंग

इसमें मिसाइल खुद कोई सिग्नल नहीं भेजती है बल्कि टारगेट से जो गर्मी या रेडियो सिग्नल निकलकर आ रहा है उसको निशाना बनाती है। इंफ्रारेड गाइडेड मिसाइल, पैसिव होमिंग सिस्टम पर ही काम करती है। इसका इस्तेमाल कम दूरी की मिसाइलों में किया जाता है। 

लेजर गाइडेंस 

इसमें जो टारगेट होता है उस पर लेजर बीम डाली जाती है। इसके बाद मिसाइल इस बीम को फॉलो करते हुए टारगेट पर हमला करती है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें