ISRO Aditya L1 Mission Launch Date
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आपको इस बारे में जानकार आश्चर्य होगा कि सूर्य खुद ही अपनी ऊर्जा का स्त्रोत है। सूर्य के भीतर नाभकिय संलयन की प्रक्रिया चलती है। यह स्थिति सूर्य के भीतर होने वाले अत्याधिक गुरुत्व प्रभाव में जन्म लेती है।
सूर्य के भीतर छिपे रहस्यों को सुलझाने के लिए नासा द्वारा कई अंतरिक्ष मिशन लॉन्च किए गए। इनमें सोहो (SOHO) और पार्कर सोलर प्रोब प्रमुख हैं। नासा के इन मिशनों ने सूर्य से जुड़े कई नए तथ्यों को हमारे सामने लाने का काम किया। इसके बावजूद अभी सूर्य में छुपी कई नई संभावनाओं को तलाशा जाना बाकी है। इसी सिलसिले में इसरो अपने आदित्य L1 मिशन के अंतर्गत सूर्य पर कामयाबी पाने के लिए तैयार है। इसरो इस मिशन के अतंर्गत सौर कोरोना का निरिक्षण करेगा।
सूर्य हर 11 सालों में अपनी मैग्नेटिक फील्ड को बदलता है। इसी को सोलर साइकिल कहा जाता है। सोलर साइकिल की इस अवधि में सूर्य पर जब बड़े-बड़े डार्क स्पॉट का निर्माण होता है। उस पीरियड को सोलर मैक्सीमम के नाम से जाना जाता है।
ISRO Aditya L1 Mission Launch Date
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सोलर मैक्सीमम की अवधि में डार्क स्पॉट बनने के कारण सूर्य से बड़ी मात्रा में सोलर फ्लेयर, कोरोनल मास इजेक्शन और ऊर्जा का रिसाव अंतरिक्ष में होता है। इसरो के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने इस बारे में जानकारी दी है कि आदित्य मिशन के अंतर्गत सूर्य से होने वाले इसी कोरोनल इजेक्शन के बारे में विस्तृत अध्य्यन किया जाएगा। ऐसे में सूर्य पर होने वाली गतिविधियों के बारे में पहले से पता लगाने में सहायता मिलेगी।
आदित्य L1 मिशन को एलएमवी एम-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन के अंतर्गत आदित्य एल 1 को 15 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंज पॉइंट 1 L1 के समीप होलो ऑर्बिट में भेजा जाएगा। आदित्य L1 में कई तरह के शानदार उपकरणों को लगाया गया है। इसमें वीईएलसी, सूट, एएसपीईएक्स, पापा, सोलेक्स, हेल10एस और मैग्नेटोमीटर शामिल हैं।
इन उपकरणों का काम सूर्य से पृथ्वी की तरफ आने वाले ऊर्जित कणों का विश्लेषण करना होगा। इस विश्लेषण के माध्यम से इसरो का आदित्य मिशन यह पता लगाएगा कि यह कण कैसे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में फंस जाते हैं। मिशन अदित्य L1 हर समय सूर्य की इमेजिंग करेगा। इसके अलावा वह सूर्य के प्रकाश मंडल, क्रोमोस्फीयर का भी अध्ययन करेगा।