खाने की क्वालिटी या जेब पर पड़ने वाला असर?
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ट्रेन का टिकट बुक करते समय अक्सर एक सवाल सामने आता है कि खाने का ऑप्शन लिया जाए या नहीं? अब लगता है कि बड़ी संख्या में यात्री इस सवाल का जवाब नहीं में दे रहे हैं। भारतीय रेलवे की कैटरिंग सेवा को लेकर सामने आए नए आंकड़ों के मुताबिक प्रीपेड कैटरिंग लेने से यात्रियों का रुझान कम हुआ है। शुरुआती अनुमान में करीब 25 से 30 फीसदी यात्री टिकट के साथ मिलने वाली प्रीपेड कैटरिंग से बाहर रहना पसंद कर रहे हैं। आईआरसीटीसी के CMD राहुल हिमालियन ने वित्त साल 2027 की पहली तिमाही के दौरान यह जानकारी दी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह अभी शुरुआती अनुमान है और आंकड़ों की पुष्टि की जानी बाकी है।
खाने की क्वालिटी या जेब पर पड़ने वाला असर?
आईआरसीटीसी के मुताबिक पहले टिकट बुक करते समय यात्री कैटरिंग का विकल्प आसानी से चुन लेते थे। अब कई यात्री अतिरिक्त कैटरिंग चार्ज से बचने के लिए यह ऑप्शन हटा रहे हैं। कंपनी का कहना है कि इसे सीधे तौर पर खाने की क्वालिटी से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। यात्रियों की बदलती पसंद भी इसकी वजह हो सकती है।
रोज 18 लाख खाना, शिकायतें 500 तक
आईआरसीटीसी हर साल करीब 58 करोड़ खाना परोसता है। रोजाना लगभग 18 लाख भोजन यात्रियों तक पहुंचाए जाते हैं। इसके मुकाबले खाने-पीने से जुड़ी शिकायतों की संख्या करीब 300 से 500 प्रतिदिन रहती है। कंपनी के अनुसार कुल भोजन की तुलना में शिकायतों का अनुपात करीब 0.0008 फीसदी है। इनमें हर शिकायत खाने की गुणवत्ता से संबंधित नहीं होती। पानी, बेबी फूड और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें आती हैं।
गुणवत्ता पर नजर, 5.13 करोड़ का जुर्माना
कैटरिंग व्यवस्था सुधारने के लिए पिछले तीन वर्षों में सेवा प्रदाताओं पर कुल 5.13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बेस किचन में लाइव सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। आधुनिक बेस किचन और फूड सेफ्टी सुपरवाइजर की व्यवस्था भी की गई है। खाने के पैकेट पर क्यूआर कोड लगाया जा रहा है, जिससे खाने की क्वालिटी और उसके तैयार होने की जगह को ट्रैक किया जा सके।
ई-कैटरिंग से यात्रियों को नया विकल्प
आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग और ई-पेंट्री को भी लगातार बढ़ा रहा है। ई-कैटरिंग के जरिए रोजाना मिलने वाले भोजन की संख्या 1.6 लाख से अधिक हो गई है। वहीं, ई-पेंट्री की सुविधा 50 से ज्यादा ट्रेनों में उपलब्ध है और इसे करीब 100 ट्रेनों तक बढ़ाने की योजना है। यात्री मोबाइल ऐप या क्यूआर कोड के जरिए ट्रेन में उपलब्ध विक्रेताओं से खाना ऑर्डर कर सकेंगे।