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Hezbollah in Lebanon: लेबनान में है किसकी सरकार? आखिर क्यों हमले कर रहा इस्राइल

Fri, 10 Apr 2026 05:08 PM IST
Sankalp Prakash Singh यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Israel Hezbollah War: हिजबुल्लाह की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। इस संगठन को ईरान का समर्थन मिला और इसका मुख्य उद्देश्य इस्राइली सेना का विरोध करना था। 
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लेबनान में इस्राइली हमलों के बाद का खौफनाक दृश्य - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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लेबनान पर इस्राइल भीषण हमले कर रहा है। गौरतलब बात है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया 14 दिवसीय युद्धविराम के बावजूद लेबनान पर इस्राइल के हमले रुक नहीं रहे हैं। इस्राइल ने लेबनान में कई प्रमुख शहरों और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों से ईरान नाराज है और प्रतिक्रिया में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही को रोक दी है। लेबनान में वर्तमान में नवाफ सलाम की सरकार है।

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यह देश  एक जटिल राजनीतिक और सैन्य संतुलन के बीच खड़ा है। हिजबुल्लाह जैसे शक्तिशाली संगठन इस देश की राजनीति और सुरक्षा में अपना गहरा प्रभाव बनाकर रखे हैं। हाल ही में इस्राइल और लेबनान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष ने इस बात को और स्पष्ट कर दिया है कि हिजबुल्लाह सिर्फ एक मिलिटेंट संगठन नहीं बल्कि एक राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य ताकत है, जिसने दशको में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

हिजबुल्लाह की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। इस संगठन को ईरान का समर्थन मिला और इसका मुख्य उद्देश्य इस्राइली सेना का विरोध करना था। धीरे-धीरे यह संगठन एक मजबूत सैन्य शक्ति बना और स्थानीय शिया समुदाय के बीच इसकी पकड़ भी मजबूत होने लगी। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
समय के साथ हिजबुल्लाह ने खुद को केवल हथियारबंद संगठन तक सीमित नहीं रखा। इसने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं के जरिए आम लोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता को बढ़ाने का काम किया। इसी वजह से लेबनान की राजनीति में भी इसकी भागीदारी बढ़ी और यह संसद व सरकार का हिस्सा बना। इसी वजह से इसका प्रभाव समय के साथ और मजबूत होता गया। 

वर्तमान स्थिति में देखें तो हिजबुल्लाह  लेबनान के भीतर एक समानांतर शक्ति संरचना जैसा दिखता है। इसकी अपनी सैन्य क्षमता है, जो कई मामलों में लेबनानी सेना से भी अधिक मानी जाती है। इसी वजह से लेबनान की सरकार कई बार इसके फैसलों को सीधे चुनौती नहीं दे पाती और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर इसका प्रभाव बना रहता है।

वर्तमान में 2026 में इस्राइल और हिजबुल्लाह  के बीच संघर्ष तेज हो गया है। इस्राइल का लक्ष्य हिजबुल्लाह  को लिटानी नदी के उत्तर में धकेलना और दक्षिण लेबनान में एक बफर जोन बनाना है। इसके अंतर्गत इस्राइल ने कई स्ट्रैटेजिक ठिकानों और सप्लाई रूट्स को निशाना बनाने का काम किया है। इसका उद्देश्य हिजबुल्लाह  तक पहुंचने वाले हथियारों की सप्लाई को रोकना है। वहीं हिजबुल्लाह  भी मिसाइल हमलों के जरिए जवाब दे रहा है, जिससे सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है और आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना हुआ है।
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