समय के साथ हिजबुल्लाह ने खुद को केवल हथियारबंद संगठन तक सीमित नहीं रखा। इसने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं के जरिए आम लोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता को बढ़ाने का काम किया। इसी वजह से लेबनान की राजनीति में भी इसकी भागीदारी बढ़ी और यह संसद व सरकार का हिस्सा बना। इसी वजह से इसका प्रभाव समय के साथ और मजबूत होता गया।
वर्तमान स्थिति में देखें तो हिजबुल्लाह लेबनान के भीतर एक समानांतर शक्ति संरचना जैसा दिखता है। इसकी अपनी सैन्य क्षमता है, जो कई मामलों में लेबनानी सेना से भी अधिक मानी जाती है। इसी वजह से लेबनान की सरकार कई बार इसके फैसलों को सीधे चुनौती नहीं दे पाती और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर इसका प्रभाव बना रहता है।
वर्तमान में 2026 में इस्राइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष तेज हो गया है। इस्राइल का लक्ष्य हिजबुल्लाह को लिटानी नदी के उत्तर में धकेलना और दक्षिण लेबनान में एक बफर जोन बनाना है। इसके अंतर्गत इस्राइल ने कई स्ट्रैटेजिक ठिकानों और सप्लाई रूट्स को निशाना बनाने का काम किया है। इसका उद्देश्य हिजबुल्लाह तक पहुंचने वाले हथियारों की सप्लाई को रोकना है। वहीं हिजबुल्लाह भी मिसाइल हमलों के जरिए जवाब दे रहा है, जिससे सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है और आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना हुआ है।