योगेश्वर दत्त के लिए साल 2012 कभी न भूलने वाले सालों में शुमार रहेगा। आखिर बीते वर्ष उनकी झोली में ओलंपिक का पदक जो आकर गिरा। लेकिन जहां दूसरे स्टार खिलाड़ियों के लिए साल 2013 में ज्यादा कुछ दांव पर नहीं होगा, वहीं योगेश्वर इस साल को भी बीते वर्ष सरीखा महत्वपूर्ण मानते हैं। इसका कारण है कि इस साल बुडापेस्ट (हंगरी) में सितंबर माह में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप।
योगेश्वर का कहना है कि उन्होंने दुनिया की हर चैंपियनशिप और गेम्स का पदक अपने नाम कर लिया है लेकिन वर्ल्ड चैंपियनशिप का पदक अब तक उनसे रूठा है। यही कारण है कि उन्होंने इस चैंपियनशिप के लिए अभी से जोरदार तैयारियों को अंजाम देना शुरू कर दिया है।
योगेश्वर कहते हैं कि इस साल को वह किसी भी कीमत पर हल्के में नहीं ले रहे हैं। उनकी कोशिश रहेगी कि वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह किसी तरह पदक हासिल करें। ओलंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई चैंपियनशिप सभी में वह पदक जीत चुके हैं। इस चैंपियनशिप को वह खाली नहीं छोड़ना चाहते हैं। वह 60 किलो भार वर्ग में ही इस चैंपियनशिप में किस्मत आजमाएंगे।
इसके बाद वह नए भार वर्ग पर फैसला कर सकते हैं। फिलहाल वह आठ जनवरी से अप्रैल माह में दिल्ली में होने जा रही एशियाई चैंपियनशिप की तैयारियों के लिए कोलरॉडो स्प्रिंग्स (अमेरिका) जा रहे हैं। फरवरी के प्रथम सप्ताह में वह अमेरिका में होने वाली डेव शुल्ट्ज टूर्नामेंट में खेलेंगे।
भारतीय कुश्ती संघ की ओर से इस चैंपियनशिप की तैयारियों के लिए नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले सभी पहलवानों को अमेरिका भेजा जा रहा है। सिर्फ लंदन ओलंपिक में खेलने वाले पहलवानों के वर्ग में दो पहलवान शामिल किए गए हैं। सुशील कुमार के अलावा गीता, नरसिंह यादव, अमित कुमार का नाम इस दौरे के लिए शामिल किया गया है।