डोप में फंसने के बावजूद पहलवान विक्रांत सिंह एशियाई खेलों की तैयारियों के लिए लखनऊ में चल रहे नेशनल कैंप में रहे। उन्होंने वियतनाम में चल रही अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल में भी भागीदीरी की। ट्रायल में हारने के बाद वह कैंप में नहीं लौटे। फरवरी में हुए फेडरेशन कप में पदक जीतकर नेशनल कैंप में जगह बनाने वाले ग्रीको रोमन पहलवान विक्रांत का नाडा ने 14 फरवरी को सैंपल लिया था। 24 मार्च को वह एक नहीं, बल्कि तीन प्रतिबंधित पदार्थों के लिए डोप पॉजिटिव पाए गए थे।
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) का दावा है कि नाडा ने विक्रांत के डोप में फंसने की जानकारी नहीं दी थी। समय पर पता चल जाता, तो उसे तत्काल कैंप से निकाल देते। विक्रांत ने नाडा को भी नोटिस का जवाब नहीं दिया और बी सैंपल भी टेस्ट नहीं कराया। नाडा ने उस पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाया है।
तीन प्रतिबंधित पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए गए
सूत्र बताते हैं कि नाडा ने 22 मई को विक्रांत का नोटिस ऑफ चार्ज कुश्ती महासंघ को भेजा। इससे पहले वह कैंप में था और ट्रायल खेला, जबकि नाडा की ओर से 26 मार्च को विक्रांत को डोप में फंसने की जानकारी दे दी गई थी। विक्रांत के सैंपल में स्टेरायड स्टेनोजोलॉल, वाडा की एस-4 कैटेगरी में आने वाले हार्मोन टैमोक्सीफेन और एस्ट्रोजेन रिसेप्टर लैट्रोजोल पाए गए। एक से अधिक प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाने की स्थिति में आठ साल तक का प्रतिबंध लग सकता है।
24 मार्च को लगा था अस्थायी प्रतिबंध
नाडा ने विक्रांत पर 24 मार्च को ही अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। इससे पहले अल्बानिया में हुए रैंकिंग टूर्नामेंट में 97 किलो भार वर्ग में खेलकर आए थे। अस्थायी प्रतिबंध लगते ही डोप में फंसा कोई भी खिलाड़ी किसी खेल गतिविधि में भाग नहीं ले सकता है। फिर भी विक्रांत नेशनल कैंप में रहे और ट्रायल भी खेले।