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CWG 2026: कौन हैं पावरलिफ्टर झंडू कुमार? उनके संघर्ष के आगे पोलियो और गरीबी भी हार गई; भारत को दिलाया पहला पदक

Sat, 25 Jul 2026 08:50 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो

सार

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का पदक खाता खोलने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार की कहानी संघर्ष, हौसले और जिद की मिसाल है। बचपन में पोलियो की चपेट में आने के बाद उन्होंने परिवार का पेट पालने के लिए सब्जियां बेचीं, ई-रिक्शा चलाया और तमाम मुश्किलों का सामना किया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
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झंडू कुमार - फोटो : ANI
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विस्तार
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राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का पहला पदक बिहार के नालंदा जिले के हरनौत गांव के रहने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने दिलाया। पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में उन्होंने 130.9 अंक हासिल करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। झंडू ने 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया, जबकि 196 किलोग्राम का उनका अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका। इस स्पर्धा का स्वर्ण नाइजीरिया के इदरीस रिलवान (132.8 अंक) और रजत इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग (131 अंक) ने जीता।

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पांच साल की उम्र में पोलियो, फिर शुरू हुआ संघर्ष

झंडू कुमार की जिंदगी आसान नहीं रही। महज पांच वर्ष की उम्र में पोलियो ने उन्हें शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण बना दिया। आर्थिक तंगी इतनी थी कि परिवार की मदद के लिए उन्हें माता-पिता के साथ सब्जियां बेचनी पड़ती थीं। हरनौत के स्थानीय बाजारों तक पहुंचने के लिए वह करीब 20 किलोमीटर का सफर करते थे। उस समय उनके पास व्हीलचेयर तक नहीं थी।

पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार - फोटो : पीटीआई

सब्जियां बेचीं, ई-रिक्शा चलाया और फिर बने चैंपियन

वर्ष 2010 से 2012 के बीच झंडू ने शुरुआत में सिर्फ शरीर को मजबूत बनाने के लिए वेट ट्रेनिंग शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने शॉट पुट और भाला फेंक में भी हाथ आजमाया, लेकिन आखिरकार पैरा पावरलिफ्टिंग को अपना करियर बना लिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए जरूरी पोषण जुटाना भी उनके लिए बड़ी चुनौती था। रोजी-रोटी चलाने के लिए उन्होंने दोस्तों से उधार लेकर ई-रिक्शा खरीदा, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान यह काम भी ठप पड़ गया। इसके बावजूद उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत करते रहे।

भारत के लिए खोला पदकों का खाता

ग्लास्गो में झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का खाता खोला। वहीं इसी स्पर्धा में भारत के सुधीर 114.1 अंक के साथ छठे स्थान पर रहे। पुरुषों के लाइटवेट वर्ग में अशोक मलिक पदक से मामूली अंतर से चूककर चौथे स्थान पर रहे, जबकि परमजीत कुमार सातवें स्थान पर रहे। महिलाओं के हेवीवेट वर्ग में कस्तूरी राजामणि अपने तीनों प्रयासों में असफल रहीं। वहीं लाइटवेट वर्ग में जसप्रीत कौर और सुमन देवी भी पदक नहीं जीत सकीं।

पावरलिफ्टर झंडू कुमार - फोटो : SAI

कोच बोले- यह भारत के पदकों की शुरुआत है

 
  • झंडू कुमार के कोच राजिंदर सिंह रहलू ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा, 'हमने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पदकों की शुरुआत कर दी है। यह हमारे लिए बेहद खुशी का पल है।'
  • भारतीय पैरा पावरलिफ्टिंग के राष्ट्रीय कोच जितेंद्र पाल सिंह ने कहा, 'पैरा पावरलिफ्टिंग सभी पैरा खेलों में सबसे कठिन खेलों में से एक है। इस प्रतियोगिता में पदक जीतने का मतलब है कि खिलाड़ी ओलंपिक स्तर पर भी पदक जीतने का दावेदार है। इससे कठिन प्रतिस्पर्धा शायद ही कोई हो। मैं अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि हमने यह पदक जीता है।'

 

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सफलता पर क्या बोले झंडू कुमार?
उनकी प्रेरणादायक कहानी मंच पर किए गए प्रदर्शन जितनी ही प्रभावशाली रही। यह इस बात का उदाहरण है कि राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पदक जीतने के पीछे कितनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और अटूट संकल्प छिपा हुआ है। झंडू कुमार का कांस्य पदक वर्षों के त्याग, अथक परिश्रम और आर्थिक कठिनाइयों से लड़ते हुए अपने खेल के सपने को जिंदा रखने का इनाम है। उनकी यह उपलब्धि ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की पदक संख्या बढ़ाने के साथ-साथ साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी बड़ी प्रेरणा बन गई है। अपनी सफलता पर झंडू कुमार ने कहा, 'यह पदक सिर्फ मेरा नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने मेरे सबसे कठिन दिनों में मेरा साथ दिया। इस सफलता ने मुझे और बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए नई प्रेरणा दी है।'
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