दीप्ति जीवांजी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में 400 मीटर टी20 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। तेलंगाना के एक छोटे से गांव में आर्थिक तंगी और सामाजिक तानों के बीच पली-बढ़ीं दीप्ति आज विश्व चैंपियन और पैरालंपिक पदक विजेता हैं। जानिए उनकी संघर्ष से सफलता तक की पूरी कहानी।
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वर्ष |
प्रतियोगिता / सम्मान |
स्पर्धा |
पदक |
प्रदर्शन / खास बात |
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2026 |
एशियन पैरा गेम्स, आइची-नागोया (जापान) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
स्वर्ण पदक |
56.36 सेकंड के समय के साथ नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। |
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2025 |
विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, नई दिल्ली (भारत) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
रजत पदक |
घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। |
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2024 |
पेरिस पैरालंपिक, पेरिस (फ्रांस) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
कांस्य पदक |
55.82 सेकंड का समय निकाला। पैरालंपिक पदक जीतने वाली बौद्धिक दिव्यांगता वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। |
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2024 |
विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, कोबे (जापान) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
स्वर्ण पदक |
55.06 सेकंड के समय के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया। |
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2024 |
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार, भारत |
खेल उपलब्धियां |
अर्जुन पुरस्कार |
खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। |
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2023 |
एशियन पैरा गेम्स, हांगझोऊ (चीन) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
स्वर्ण पदक |
56.69 सेकंड के समय के साथ गेम्स रिकॉर्ड बनाया। |
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2023 |
वर्चुअस ग्लोबल गेम्स, विची (फ्रांस) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
दो रजत पदक |
बौद्धिक दिव्यांगता वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की। |