एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया ने दिग्गज एथलीटों के प्रशिक्षकों को कैंप से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। लेकिन लॉंग जंपर मयूखा जॉनी वॉकर केटी इरफान जैसे एथलीटों ने अपनी तैयारियों का हवाला देकर फेडरेशन पर दबाव बनाते हुए अपने प्रशिक्षकों को कैंप में वापस बुलवा लिया। लेकिन गुआंग झू एशियाई खेलों में 400 मीटर बाधा का स्वर्ण जीतने वाले जोसेफ अब्राहम ने अपने कोच राजिंदर सिंह को कैंप से बाहर किए जाने पर अपनी तरह से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
उन्होंने एनआईएस पटियाला में चल रहे कैंप में नाम होने के बावजूद त्रिवेंद्रम के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस को ज्वाइन कर लिया है। लंदन ओलंपिक के प्रदर्शन के आधार पर की गई समीक्षा के बाद एएफआई ने मयूखा जॉनी के प्रशिक्षक श्याम कुमार, लंदन में दसवां स्थान हासिल करने वाले पद चालक केटी इरफान के कोच गुरदेव सिंह, जोसेफ के कोच राजिंदर सिंह के अलावा डिकेथलन कोच संजय गणनायक, हैमर थ्रो कोच शुभदीप सिंह को कैंप से बाहर कर दिया।
फेडरेशन की इस कार्रवाई के बाद मयूखा व इरफान ने फौरन साई को पत्र लिखकर उनके प्रशिक्षकों को कैंप में शामिल किए जाने की गुहार लगाई। इसी तरह के प्रार्थना पत्र संजय गणनायक व शुभदीप सिंह के लिए भी लिखे गए। मयूखा व इरफान ने साई को लिखा कि उनकी सफलता में इन प्रशिक्षकों का अहम योगदान है। उन्हें निकालने से उनकी तैयारियां प्रभावित होंगी। इसके बाद साई ने इन दोनों प्रशिक्षकों को कैंप में शामिल कर लिया।
इसके ठीक उलट लंदन ओलंपिक से पहले राजनीति का शिकार हुए जोसेफ ने फेडरेशन की इस कार्रवाई के बाद त्रिवेंद्रम सेंटर ऑफ एक्सिलेंस ज्वाइन कर लिया। पिछले सात-आठ सालों से वह लगातार कैंप में रहे हैं जबकि सेंटर ऑफ एक्सिलेंस उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए होता है। कैंप ज्वाइन नहीं करने के पीछे उन्होंने इसी सेंटर को ज्वाइन करने का तर्क दिया है। लेकिन सच्चाई यह है कि जोसेफ कोच को निकाले जाने से आहत हैं। एएफआई अध्यक्ष आदिल सुमारीवाला का कहना है कि प्रशिक्षकों को उनके प्रदर्शन की समीक्षा के बाद कैंप से हटाया गया है। लेकिन उनके एथलीट ही दबाव बना रहे हैं तो वह क्या कर सकते हैं।