फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या था बीएआई की फंडिंग में कटौती की वजह?: साई ने किया खुलासा, बताया- कहां हुई चूक

Tue, 03 Nov 2026 04:00 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

साई के सूत्रों ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया, 'बीएआई ने पहले से तय समय में अपना प्रस्ताव जमा नहीं किया। फेडरेशन को भी जिम्मेदारी से काम करना शुरू करना होगा।'
विज्ञापन
साई ने किया खुलासा - फोटो : IANS
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पीवी सिंधू और लक्ष्य सेन जैसे स्टार खिलाड़ियों से जुड़ी बैडमिंटन फंडिंग में कटौती की चिंताओं के बीच, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने उन खबरों को खारिज कर दिया कि जापान में एशियन गेम्स में बिना मेडल के प्रदर्शन के कारण फंडिंग में कटौती हुई। इसका कारण बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) का अपना प्रस्ताव जमा करने की 30-दिन की डेडलाइन को पूरा न कर पाना बताया गया है। 
विज्ञापन


साई के सूत्रों ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया, 'बीएआई ने पहले से तय समय में अपना प्रस्ताव जमा नहीं किया। फेडरेशन को भी जिम्मेदारी से काम करना शुरू करना होगा।' सिंधू और लक्ष्य रविवार को जर्मनी के सारलैंडहाले में खत्म हुए बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 500 इवेंट हाइलो ओपन 2026 में महिला एकल और पुरुष एकल के चैंपियन बने। चार साल में यह पहली बार है जब दो भारतीयों ने एक ही बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर इवेंट में सुपर 500 स्तर या उससे ऊपर के दो खिताब जीते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, साई ने भारतीय टीम के यूरोपियन लेग को फंड देने से मना कर दिया, जिसमें फिनलैंड, डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी में लगातार चार टूर्नामेंट शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि खिलाड़ियों को इस फैसले के बारे में 6 अक्टूबर को फिनलैंड के वांता में आर्कटिक ओपन शुरू होने से कुछ दिन पहले ही बताया गया था।
विज्ञापन


साई का कहना है कि देरी इसलिए हुई क्योंकि बीएआई डेडलाइन पूरी नहीं कर पाया, जिससे समय पर प्रस्ताव देने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी फेडरेशन पर आ गई। साई के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, 'पहले, नियमों के मुताबिक फेडरेशन को बिना नामों के 90 दिन पहले और नामों के साथ 60 दिन पहले प्रस्ताव जमा करने होते थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि आप अपनी ट्रिप की प्लानिंग काफी पहले कर सकते थे। लेकिन फेडरेशन ने कहा कि वह इतनी जल्दी ऐसा नहीं कर सकता, इसलिए हमने डेडलाइन को बदलकर 30 दिन कर दिया। फिर भी, हमें प्रस्ताव नहीं मिला।'

अधिकारी ने कहा, 'ये नई गाइडलाइंस सभी पर लागू होती हैं। अगर हमारे पास टूर्नामेंट से 30 दिन पहले नामों के साथ प्रस्ताव नहीं है, तो हम उसे प्रोसेस नहीं करेंगे।' पैसे की तंगी का मतलब यह भी था कि कुछ खिलाड़ियों को अपने कोच के बिना खेलना पड़ा। अश्मिता चालिहा ने जब फ्रेंच ओपन में अकाने यामागुची को हराया था, तो उनके साथ भारत की साथी खिलाड़ी इशारानी बरुआ थीं, वहीं डेनमार्क में क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली तन्वी शर्मा के पास मैच के दौरान उन्हें गाइड करने के लिए कोई कोच नहीं था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें