महज नौ माह की उम्र में कार दुर्घटना के कारण कमर से नीचे के हिस्से की जान खो देने वाली सिमरन शर्मा अब 17 साल की हैं। व्हील चेयर पर जीवन गुजार रहीं सिमरन की जिंदगी चार वर्ष पहले शूटिंग शुरू होने से बदल गई। साई के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस की ट्रेनी सिमरन बीते वर्ष खेलो इंडिया चैंपियन बनीं व राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी तीन स्वर्ण जीते। उनका सपना जापान में पैरा एशियाई खेलों में पदक जीतने का है, जो खराब चयन नीति से पूरा होता नहीं दिख रहा। मई में एशियाड के चयन ट्रायल में नंबर एक रहने के बावजूद सिमरन भारतीय टीम में जगह नहीं बना पाई हैं। सिमरन ने ट्रायल में 633.3 का स्कोर किया जो पिछले पैरा एशियाड के चौथे स्थान के स्कोर 633.1 से बेहतर है उनकी एसएच 2 कैटेगरी बिना किसी का चयन किए खाली छोड़नी दी गई है।
चयन नीति को रखा कटघरे में
सिमरन के पिता बृजेश शर्मा ने कोर्ट में पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया की चयन नीति को चुनौती दी है। नीति के मुताबिक, सिमरन की कैटेगरी 10 मीटर एयर राइफल प्रोन एसएच-2 (आर-5) का योग्यता स्कोर 635.4 है, जबकि आयोजकों का योग्यता स्कोर 625 है। खेल मंत्रालय ने स्पष्ट कर रखा है कि एशियाड और पैरा एशियाड में वही खेलेंगे जो एशियाई स्तर पर शीर्ष छह में आते हो। 635.4 का स्कोर पिछले पैरा एशियाड के शीर्ष चार में आता है। इतना अधिक स्कोर होने के कारण इसमें क्वालिफाई करना मुश्किल है।