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Wimbledon 2026: क्या अनिसिमोवा ने भुलाया पिछले साल का दर्द? जानिए कैसे प्लिस्कोवा ने भी कोर्ट पर मचाया तहलका

Tue, 30 Jun 2026 10:28 PM IST
शिवम गर्ग स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

विंबलडन 2026 में अमांडा अनिसिमोवा और कैरोलिना प्लिस्कोवा ने सीधे सेटों में धमाकेदार जीत दर्ज कर दूसरे राउंड में जगह बनाई है। जानिए कैसा रहा दोनों दिग्गजों का प्रदर्शन।
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विंबलडन - फोटो : IANS
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विस्तार
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ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले जा रहे विंबलडन 2026 में मंगलवार को टूर्नामेंट के पहले राउंड के मुकाबलों में अमांडा अनिसिमोवा और कैरोलिना प्लिस्कोवा ने अपने-अपने मैचों में सीधे सेटों में शानदार जीत हासिल की है। इस धमाकेदार प्रदर्शन के साथ ही दोनों स्टार खिलाड़ियों ने दूसरे राउंड में अपनी जगह सुरक्षित कर ली है।
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क्या अनिसिमोवा ने पिछले साल की हार को भुलाकर की धमाकेदार शुरुआत?
छठी वरीयता प्राप्त अमांडा अनिसिमोवा के लिए यह मुकाबला पिछले साल की कड़वी यादों को पीछे छोड़ने जैसा था। पिछले साल इगा स्वियातेक के खिलाफ चैंपियनशिप मैच में मिली दिल तोड़ने वाली हार के बाद वह कोर्ट पर उतरीं और पहली ही गेम से पूरी तरह सहज नजर आईं। अमेरिकी खिलाड़ी अनिसिमोवा को नॉर्थ मैसेडोनिया की लीना ग्योर्चेस्का को 6-3, 6-2 से हराने में एक घंटे से थोड़ा ही ज्यादा वक्त लगा।

उन्होंने अपने ट्रेडमार्क बेसलाइन पावर के दम पर रैलियों में पूरी तरह अपना दबदबा बनाए रखा। पूरे मैच के दौरान अनिसिमोवा ने 17 विनर्स लगाए और अपनी पहली सर्विस पर 83 प्रतिशत अंक हासिल किए। खास बात यह रही कि अनिसिमोवा को पूरे मुकाबले में एक भी ब्रेक प्वाइंट का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने मिले चार ब्रेक-प्वाइंट के मौकों में से तीन को भुनाया और महज 61 मिनट में मैच अपने नाम कर लिया।
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क्यों खास रहा हार के बावजूद लीना ग्योर्चेस्का का सफर?
भले ही 31 वर्षीय लीना ग्योर्चेस्का को इस मुकाबले में हार का मुंह देखना पड़ा, लेकिन उन्होंने एक बड़ा इतिहास अपने नाम कर लिया है। वह नॉर्थ मैसेडोनिया की पहली ऐसी टेनिस खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्होंने क्वालीफाइंग टूर्नामेंट की बाधा पार कर विंबलडन सिंगल्स के मेन ड्रॉ में जगह बनाई। इसी सफर के दौरान उन्होंने अपने करियर की पहली प्रोफेशनल ग्रास-कोर्ट जीत भी दर्ज की थी।

हालांकि, मेन ड्रॉ में दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों में शुमार अनिसिमोवा का सामना करना उनके लिए एक बेहद कठिन चुनौती साबित हुआ। मैच के दौरान ग्योर्चेस्का ने आठ डबल फॉल्ट किए और उनका फर्स्ट-सर्व प्रतिशत भी सिर्फ 41 प्रतिशत रहा। इस कमजोर सर्विस के कारण वह अपनी प्रतिद्वंद्वी पर कोई दबाव नहीं बना सकीं, जिन्होंने उन्हें वापसी का कोई मौका नहीं दिया।
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क्या प्लिस्कोवा ने अपनी ही देश की खिलाड़ी को हराकर तोड़ा चार साल का सूखा?
दूसरी तरफ, पूर्व फाइनलिस्ट कैरोलिना प्लिस्कोवा ने भी कोर्ट पर अपना जलवा बिखेरा। उन्होंने अपनी ही देश (चेक गणराज्य) की खिलाड़ी वैलेंटोवा को एक घंटे 15 मिनट चले मुकाबले में 6-3, 6-4 से शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही प्लिस्कोवा ने चेक गणराज्य के खिलाड़ियों के खिलाफ अपने करियर के शानदार रिकॉर्ड को और मजबूत करते हुए 46-26 कर लिया है। यह विंबलडन मेन-ड्रॉ में प्लिस्कोवा की 19वीं जीत है और साल 2022 के बाद यानी पिछले चार वर्षों में इस चैंपियनशिप के मेन ड्रॉ में उनकी पहली जीत है।

मामूली अंतर से तय हुआ इस कड़े मुकाबले का नतीजा?
इस मैच का फैसला बेहद बारीक अंतर से हुआ, जहां हर सेट में सिर्फ एक सर्विस ब्रेक ही निर्णायक फैक्टर साबित हुआ। प्लिस्कोवा ने दोनों ही सेटों के आठवें गेम में महत्वपूर्ण बढ़त बनाई। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पहले सेट के बीच में तब आई, जब स्कोर 3-3 की बराबरी पर था और वैलेंटोवा ने मैच का एकमात्र ब्रेक प्वाइंट हासिल कर लिया था।

ऐसे नाजुक मोड़ पर प्लिस्कोवा ने एक शानदार फोरहैंड विनर लगाकर इस खतरे को टाल दिया और वहीं से पूरे मैच का पासा पलट दिया। इसके बाद उन्होंने पहले सेट के आखिरी तीनों गेम अपने नाम किए। दूसरे सेट में भी उनका यही दबदबा कायम रहा, जहां उन्होंने आखिरी 13 पॉइंट में से 12 पॉइंट जीतकर अपनी युवा प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और मुकाबला अपने नाम कर लिया।
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