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US Open: फेडरर, जोकोविच और सेरेना पर होंगी निगाहें

Mon, 25 Aug 2014 04:09 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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साल के चौथे और आखिरी ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट यूएस ओपन का आगाज सोमवार से हो रहा है। जबरदस्त फॉर्म में चल रहे स्पेन के राफेल नदाल की अनुपस्थिति में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और रिकॉर्ड 17 ग्रैंड स्लैम खिताबों के विजेता रोजर फेडरर का दावा मजबूत माना जा रहा है।
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हालांकि ब्रिटेन के एंडी मरे को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है लेकिन अंतिम चार तक पहुंचने से पहले उन्हें क्वार्टर फाइनल में जोकोविच से भिड़ना पड़ सकता है।

2011 के चैंपियन जोकोविच को इस बार टूर्नामेंट में शीर्ष वरीयता दी गई है, जबकि 2012 के विजेता मरे को आठवीं वरीयता मिली है।

क्वार्टर फाइनल से पहले मरे के लिए प्री-क्वार्टर फाइनल भी आसान नहीं होगा क्योंकि वहां उनका सामना जबरदस्त फॉर्म में चल रहे नौवीं सीड फ्रांस के जो विल्फ्रेड सोंगा से हो सकता है। दूसरी ओर, फेडरर क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया के ग्रीगोर दिमित्रोव से भिड़ सकते हैं।
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महिला वर्ग में सेरेना का दावा मजबूत
महिला वर्ग में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी अमेरिका की सेरेना विलियम्स का दावा मजबूत माना जा रहा है। 2 बार की चैंपियन स्थानीय खिलाड़ी सेरेना के लिए सबसे बड़ी बाधा क्वार्टर फाइनल में सर्बिया की अना इवानोविच बन सकती हैं जो इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के चौथे राउंड में उन्हें हरा चुकी हैं।

हालांकि सेरेना का इवानोविच के खिलाफ हार जीत का रिकॉर्ड 7-1 का है। इसके अलावा सेरेना को प्री-क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की सामंथा स्टोसर से भी भिड़ना पड़ सकता है।

दूसरी ओर, सेरेना की बड़ी बहन वीनस विलियम्स को खिताब के लिए एड़ी चोटी का जोड़ लगाना पड़ सकता है क्योंकि अंतिम चार में पहुंचने से पहले उन्हें दूसरी सीड सिमोना हालेप और पांचवीं सीड रूस की मारिया शारापोवा जैसी दिग्गज खिलाड़ियों की चुनौतियों से पार पाना होगा।

सिंगल्स में कोई भारतीय नहीं
टूर्नामेंट के सिंगल्स मुकाबलों में इस बार कोई भी भारतीय चुनौती पेश नहीं करेंगे। महिला वर्ग में सानिया मिर्जा के सिंगल्स मुकाबलों से हटने के बाद वैसे ही चुनौती अब नहीं रहती हैं, लेकिन पुरुष वर्ग में हर ग्रैंड स्लैम में कोई न कोई भारतीय जरूर चुनौती पेश करते रहे हैं।
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इस बार भी यूकी भांबरी, सनम सिंह और सोमदेव देववर्मन चुनौती पेश करने पहुंचे थे लेकिन क्वालीफाइंग मुकाबलों से ही इन्हें बाहर का रास्ता देखना पड़ा।

हालांकि लिएंडर पेस, रोहन बपन्ना और सानिया की उपस्थिति में डबल्स मुकाबलों में खिताब की उम्मीद की जा सकती है।
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