नियमों के बावजूद नहीं मिली सुनवाई
28 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि एटीपी नियमों के तहत खिलाड़ी को गेंद के बाउंस के बाद एक बार स्ट्राइक करने और फिर कॉल को चुनौती देने की अनुमति होती है, बशर्ते खेल पर असर न पड़े। नागल का कहना है कि उनकी अपील भी इन्हीं नियमों के तहत थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सही सुनवाई नहीं मिली।
एक ही पॉइंट में तीन गलत फैसले का आरोप
नागल ने दावा किया कि उन्हें एक ही पॉइंट में तीन गलत फैसलों का सामना करना पड़ा न कॉल दिया गया, न रेफरी नीचे आए और न ही उनकी अपील को सही तरीके से देखा गया। उन्होंने कहा कि उस समय मैं बहुत निराश और टूटा हुआ महसूस कर रहा था, क्योंकि मैं खुद का बचाव भी नहीं कर सका। उस पॉइंट के बाद आगे खेलना मेरे लिए भावनात्मक रूप से मुश्किल हो गया।
अंपायरिंग सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल
भारतीय खिलाड़ी ने टेनिस में अंपायरों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को गलतियों के लिए आर्थिक दंड मिलता है, लेकिन अंपायरों पर ऐसी कोई जवाबदेही नहीं होती। नागल ने एटीपी और इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (आईटीएफ) से अपील करते हुए कहा कि चैलेंजर स्तर के मैचों में तकनीक का अधिक उपयोग होना चाहिए ताकि गलत फैसलों से बचा जा सके। उन्होंने लिखा "2026 में जब तकनीक उपलब्ध है, तो मैच सिर्फ रेफरी पर निर्भर नहीं होने चाहिए। खिलाड़ियों को भी अपने बचाव का मौका मिलना चाहिए।"