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जीत जाते तो अगले दौर में पूरा होता साकेत का सबसे बड़ा 'ख्वाब'

Tue, 30 Aug 2016 12:07 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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साकेत मायेनी - फोटो : PTI
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28 साल की उम्र में ग्रैंड स्लैम करियर शुरू करने वाले भारतीय खिलाड़ी ने पहले ही मैच में उम्मीद से कहीं ज्यादा जोरदार खेल दिखाया लेकिन इसे जीत में बदल नहीं पाए।
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एकल वर्ग में खेलने उतरे एकमात्र भारतीय और दुनिया के 143वें नंबर के खिलाड़ी साकेत मायेनी ने अपने से कहीं उच्च रैंकिंग के चेक गणराज्य के खिलाड़ी जिरी वैस्ले को 3 घंटे और 47 मिनट तक चले मुकाबले में जोरदार चुनौती दी और एक बार उनके पास एक मैच प्वाइंट भी आ गया था लेकिन इसके बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

अगर वह यह मैच जीत लेते तो अगले दौर में उनका मुकाबला दुनिया के चोटी के खिलाड़ी नोवाक जोकोविच से होता। जो उनके करियर के लिए बहुत बड़ी बात होती।

साकेत ने वैस्ले को जीत के लिए खूब थकाया। पौने 4 घंटे चले इस मुकाबले साकेत 6-7 (5), 6-4, 6-2, 2-6, 5-7 से हार गए। साकेत ने इस कदर जोरदार खेल दिखाया कि मैच के अंतिम और पांचवें सेट के आठवें गेम में वह मैच प्वाइंट हासिल करने में कामयाब हो गए थे, लेकिन निर्णायक जंग में थकान उन पर हावी हो गया और इसे जीत में बदल नहीं सके।
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साल के चौथे और अंतिम टेनिस ग्रैंड स्लैम अमेरिकी ओपन के पुरुष एकल के क्वालीफांइग राउंड के सभी तीनों मैच जीतकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के मुख्य ड्ऱ़ॉ में जगह बनाने वाले साकेत मायेनी पहले ही दौर में हार गए।

चार सेट के बाद निर्णायक सेट में साकेत ने चौथे गेम में चेक खिलाड़ी का सर्विस ब्रेक कर सेट में 3-1 की बढ़त बना ली, फिर यह बढ़त 4-2 की हो गई। लेकिन इस बीच उन्हें दाएं जांघ में दर्द के कारण मेडिकल टाइम आउट लेना पड़ा। हालांकि इसके बाद भी वह बढ़त को 5-2 तक करने में कामयाब रहे। लेकिन इसके बाद उनकी मैच में पकड़ ढीली होती गई।
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आगे साकेत ने अपने दोनों सर्व गंवा दिए। फिर इसके बाद मैच प्वाइंट हासिल करने के बाद भी वह जीत हासिल नहीं कर सके।
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