यह साफ हो गया है कि कोरिया के खिलाफ होने वाले डेविस कप टाई से पहले विद्रोही टेनिस खिलाड़ियों व ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन के बीच सुलह की कोई उम्मीद नहीं है। आईटा के अध्यक्ष अनिल खन्ना की ओर से खिलाड़ियों से सुलह कराने व उनकी मांगों पर बात करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी के गठन का प्रस्ताव रखा गया है।
सेवानिवृत जज या सरकारी अधिकारी और नामवर टेनिस खिलाड़ी की अगुवाई में इस कमेटी का गठन तीन फरवरी को किया जाएगा। वहीं आईटा ने सोमदेव देववर्मन के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों से मांगों के बारे में कोई बात नहीं की गई।
आईटा के सेक्रेटरी जनरल भरत ओझा की ओर से कहा गया है कि यह उच्च स्तरीय कमेटी खिलाड़ियों से उनकी मांगों के बारे में बात करेगी साथ ही उचित सुलह व डेविस कप कोड ऑफ कंडक्ट लागू कराने की ओर मामले को आगे बढ़ाएगी।
वहीं आईटा के कार्यकारी निदेशक कर्नल रणवीर चौहान व अमरबीर सिंह की ओर से कहा गया है कि विष्णु वर्धन, सनम सिंह व साकेत मिनेनी से आईटा लगातार संपर्क में थी। उन्हें यह बता दिया गया था कि खिलाड़ियों के बिजनेस क्लास हवाई यात्रा की मांग को स्वीकार कर लिया गया है। लेकिन कोच व कप्तान के चयन पर आईटा का अधिकार है।
जीशान अली के बारे में भी खिलाड़ियों को स्थिति साफ कर दी गई थी। विष्णु से कहा गया था कि वह इस बारे में सोमदेव से बात कर लें और उन्हें उनका जवाब बताएं। लेकिन जब इन तीनों से ही शुक्रवार की सुबह 11 बजे तक फोन मिलाया गया तो किसी ने भी जवाब नहीं दिया। इसके बाद दूसरे दर्जे की टीम का चयन किया गया है।
आईटा ने यह जरूर स्वीकार किया खिलाड़ियों के साथ लिखित में कोई बात नहीं की गई है। आईटा को गैर पेशेवर करार दिए जाने का भी जोरदार विरोध किया गया है। आईटा ने कहा है कि यह खिलाड़ी ही थे जो अंतिम समय में बात करने के लिए उपलब्ध नहीं हुए।