भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव को लेकर माहौल गरम है। अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोक रहे अभय सिंह चौटाला को अनुभवी रणधीर सिंह से चुनौती मिल रही है। कई वजहों से विवादास्पद इस चुनाव पर खेल मंत्रालय से लेकर इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की निगाह है। इस पूरे मामले पर अभय सिंह चौटाला से हेमंत रस्तोगी ने बातचीत की-
:- आप आईओए के अध्यक्ष पद पर दावा जता रहे हैं। अगर जीते, तो खेलों के लिए क्या एजेंडा बनाएंगे?
:- मेरा एक ही एजेंडा है कि खेलों को बढ़ावा दिया जाए। मेरा लक्ष्य ओलंपिक में भारत को पदक तालिका में लंदन से ऊपर देखना है।
:- इसके लिए क्या योजना है? क्या खेल मंत्रालय के बिना यह संभव है?
:- खेल मंत्रालय की मदद के बिना खेलों को आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है? इसमें उसकी आर्थिक मदद की जरूरत तो पड़ेगी ही। हां, मैं अपने कार्यकाल में ज्यादा से ज्यादा प्रायोजक लाने की कोशिश करूंगा, जिससे खेल संघों और राज्य संघों की मदद की जा सके।
:- आईओए और खेल मंत्रालय के मतभेदों के बीच आपको मदद की कितनी उम्मीद है?
:- मेरी कोशिश रहेगी कि खेल मंत्रालय को साथ लेकर चला जाए। मैं जीतता हूं, तो सबसे पहले खेल मंत्री के साथ बैठकर सारे मतभेदों को दूर करूंगा। मैं उन्हें खेल संघों की दिक्कतों के बारे में भी बताऊंगा। आपस में मिल-बैठकर ही सारे विवाद दूर किए जाएंगे।
:- खेल मंत्रालय का आईओए के साथ सिर्फ स्पोर्ट्स कोड को लेकर विवाद है, जिसका आप सभी विरोध कर रहे हैं।
:- कोड को लेकर कोई झगड़ा नहीं होना चाहिए। इस बारे में मैं खेल मंत्री से बात करूंगा। ध्यान रखने की बात है कि स्पोर्ट्स कोड अभी तक कानून नहीं बना है। अगर खेल मंत्रालय कोड लागू करना चाहता है, तो सबसे पहले संसद में इसे पारित कराकर कानून की शक्ल दे। इससे पहले मंत्रालय इसे खेल संघों पर भला कैसे थोप सकता है? यह नहीं भूलना चाहिए कि खेल मंत्रालय के लिए इस कोड को संसद में पारित कराना इसलिए आसान नहीं है, क्योंकि यह राज्यों का विषय है।
:- आपको चुनाव में दागदारों का साथ मिल रहा है। सुरेश कलमाडी का आपको पीछे से समर्थन है।
:- सच यह है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में सुरेश कलमाडी के साथ जो टीम थी, वही इस चुनाव में मेरे साथ खड़ी है। इस टीम ने खेलों के लिए काफी कुछ किया है। इसका इस क्षेत्र में अपार अनुभव है।
:- आपके ग्रुप से ललित भनोट महासचिव का चुनाव लड़ रहे हैं। उनका चुनाव लड़ना कहां तक जायज है?
:- ललित भनोट के चुनाव लड़ने पर मुझे कोई एतराज नहीं। सचाई तो यह है कि उनके खिलाफ जो भी मामले चल रहे हैं, वे अभी तक अदालत में हैं। उन्हें किसी में भी दोषी नहीं करार दिया गया है। उन्होंने खेलों को जितना योगदान दिया है, उतना कम लोगों ने किया है।
:- आप बॉक्सिंग फेडरेशन के संविधान में परिवर्तन कराकर उसके चेयरमैन बने। कइयों ने खेल मंत्रालय को शिकायत की है। मंत्रालय फेडरेशन की मान्यता खत्म करने जा रहा है?
:- सिर्फ तीन शिकायतों के आधार पर मंत्रालय सेवानिवृत्त जज और आईओए पर्यवेक्षक की निगरानी में कराए गए बॉक्सिंग संघ के चुनाव पर सवालिया निशान लगा रहा है। मैंने चुनाव के लिए मंत्रालय से पर्यवेक्षक भेजने को कहा था, पर उसने नहीं भेजा। ऐसे में मेरी क्या गलती है? रही बात फेडरेशन की मान्यता रद्द करने की, तो मंत्रालय ऐसा नहीं कर सकता। बॉक्सिंग ने इस देश को दो ओलंपिक पदक दिए हैं। अगर इस खेल की आर्थिक मदद बंद की गई, तो पूरे देश में हल्ला मच जाएगा।