क्रिकेट और हॉकी में कई स्टार देने वाला उत्तर प्रदेश अब कुश्ती में भी सिरमौर होगा। यहां के गांवों में कई ‘सुशील’ ताल ठोंकते नजर आएंगे। इस भागीरथी कार्य का बीड़ा अंतरराष्ट्रीय पहलवान सुशील कुमार ने उठाया है। हॉकी प्रतियोगिता का उद्घाटन करने यहां आए सुशील ने जल्द ही प्रदेश में स्तरीय अखाड़ा खोलने की बात कही।
उन्होंने कहा कि देश में कुश्ती का लंबा इतिहास रहा है। हर गांव और गली में यह खेल होता रहा है। हालांकि सुविधा और प्रशिक्षण के अभाव में प्रतिभाएं गांवों में ही दम तोड़ देती हैं। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र से पहलवान उभरकर आ रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश पिछड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ओलंपिक में रजत जीतने के बाद उन्होंने ठान लिया था कि इस खेल को वह नई धार देंगे। खासतौर से यूपी के गांवों की छुपी प्रतिभा को कुश्ती के दांव पेच सिखाएंगे। इसके लिए यूपी में रेसलिंग का स्तरीय एकेडमी खोलने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सहयोग का आश्वासन देते हुए जमीन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
अगली बार गोल्ड पक्का
ओलंपिक में ‘गोल्ड’ हाथ नहीं लगने के सवाल पर उन्होंने उदास मन से कहा कि यह हार सालती है, क्योंकि इससे पहले जापानी पहलवान को वह धूल चटा चुके थे। हालांकि हंसते हुए सुशील ने वादा किया कि अबकी बार गोल्ड पक्का है।
खेलों में बढ़ती राजनीति पर चुप्पी
भारतीय ओलंपिक संघ पर आईओसी के प्रतिबंध के निर्णय को गलत बताने वाले सुशील खेलों में बढ़ती राजनीति पर चुप्पी साध गए। उनका कहना है कि खिलाड़ी को सिर्फ खेल पर ध्यान देना चाहिए, ऊपरी स्तर पर क्या हो रहा है, यह जानना जरूरी नहीं। नए खिलाड़ियों को अनुशासन का मूलमंत्र देते हुए उन्होंने नियमित अभ्यास पर जोर दिया।