लगातार दो ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व
वर्ष 2012 में सुधा सिंह ने अपना ही पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए 9:47.70 मिनट का समय निकाला और लंदन ओलंपिक के लिए सफलतापूर्वक क्वालिफाई किया। उन्होंने 2012 (लंदन) और 2016 (रियो) के लगातार दो ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, इन दोनों ही ओलंपिक में वह देश के लिए पदक जीतने में सफल नहीं हो सकीं, लेकिन इस महाकुंभ में उनकी भागीदारी ही भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी उपलब्धि रही।
पदक और उपलब्धियों का सफरनामा
सुधा सिंह की शानदार खेल उपलब्धियों पर नजर डालें तो उन्होंने 3,000 मीटर स्टीपलचेज में देश को कई गौरवपूर्ण क्षण दिए हैं:
- एशियन गेम्स: 2010 (ग्वांगझू) में स्वर्ण पदक और 2018 (जकार्ता) में रजत पदक।
- एशियन चैंपियनशिप: 2017 (भुवनेश्वर) में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा 2009 (ग्वांगझू), 2011 (कोबे) और 2013 (पुणे) में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किए।
खेल को अलविदा और राष्ट्रीय सम्मान
लंबे समय तक ट्रैक पर दौड़ने के बाद सुधा सिंह ने वर्ष 2022 में खेल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। खेल जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2012 में उन्हें प्रतिष्ठित 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया था। इसके बाद वर्ष 2021 में उन्हें भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से भी नवाजा गया।