आईबा और खेल मंत्रालय के प्रतिबंध के बाद इंडियन बॉक्सिंग फेडरेशन ने सुलह की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। 15 दिनों की समय सीमा पूरे होने पर फेडरेशन ने न सिर्फ खेल मंत्रालय के कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया है, बल्कि आईबा के निर्देश के मुताबिक संविधान में संशोधन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
फेडरेशन ने इस विवाद के अंत के लिए मंत्रालय से न सिर्फ बातचीत का समय मांगा है बल्कि नए चुनाव कराने के भी संकेत दिए हैं। हालांकि इस विवाद की भेंट आईबीएफ का फेडरेशन कप चढ़ गया है। बंगलूरू में खेला जाने वाला यह टूर्नामेंट अंतिम क्षणों में रद्द कर दिया गया। जबकि कई बॉक्सर इसमें खेलने के लिए बंगलूरू रवाना हो चुके थे।
प्रतिबंधित आईबीएफ के सेक्रेटरी जनरल राजेश भंडारी के मुताबिक मंत्रालय के नोटिस के जवाब में कहा गया है कि जिस तरह मंत्रालय के निर्देश दिए गए उसी अनुसार चुनाव कराए गए हैं। पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने के लिए फेडरेशन के अधिकारी मंत्रालय से आमने-सामने बात करने के इच्छुक हैं। उन्हें इसके लिए समय दिया जाए। यही नहीं मंत्रालय जिस तरह से चुनाव कराना चाहती है फेडरेशन उसके लिए भी तैयार है।
हालांकि खेल मंत्रालय ने संकेत दिए थे कि अगर निर्धारित समय सीमा में आईबीएफ का जवाब नहीं मिलता है तो उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं चुनाव हुए तो चौटाला को चेयरमैन पद छोड़ना होगा। दूसरी ओर भंडारी ने यह भी साफ कर दिया कि आईबा संविधान के मुताबिक फेडरेशन का संशोधित संविधान तैयार करने को बैठक हो चुकी है। इस संशोधित संविधान का ड्राफ्ट मंजूरी के लिए आईबा को भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद ही इसे अमली जामा पहनाने के लिए आम सभा की बैठक में इसे रखा जाएगा।
इस सारे विवाद में 13 से 16 दिसंबर को होने वाला फेडरेशन कप टल गया। भंडारी का कहना है कि टूर्नामेंट की नई तिथियां घोषित नहीं हुई हैं। वह यह भी कहते हैं कि टूर्नामेंट टलने की वजह प्रतिबंध नहीं है। लेकिन आनन फानन में रद्द किए गए टूर्नामेंट के लिए बॉक्सर खेलने के लिए निकल पड़े थे। यहां तक नेशनल कैंप में शामिल कुछ बॉक्सरों को यहां खेलने के लिए छोड़ दिया गया था।