पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन और लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मैरीकॉम की लड़कियों से बॉक्सिंग में कुछ कर गुजरने की अपील पर बट्टा लगता नजर आ रहा है। इंडियन बॉक्सिंग फेडरेशन (एआईबीएफ) ने खटीमा (उत्तराखंड) में 18 से 23 मई को सीनियर महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप घोषित कर दी है। लेकिन फेडरेशन के इस कदम के बाद कई राज्य संघों ने इस चैंपियनशिप के आयोजन का विरोध शुरू कर दिया है।
इन राज्य संघों ने आगाह किया है कि अगर यह चैंपियनशिप प्रतिबंधित एआईबीएफ कराएगा तो उसे आईबा की कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। जिसका सीधा नुकसान बॉक्सरों को उठाना होगा।
हालांकि राज्य संघ इस चैंपियनशिप के आयोजन का कड़ा विरोध जरूर कर रहे हैं लेकिन फेडरेशन इसे कराने पर अड़ी हुई है। सिर्फ आईबा नहीं बल्कि खेल मंत्रालय की ओर से भी नेशनल चैंपियनशिप के लिए दी जाने वाली ग्रांट भी फेडरेशन को नहीं दी जाएगी। मंत्रालय ने भी फेडरेशन को प्रतिबंधित कर रखा है। आईबा की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अब तक कोई नेशनल चैंपियनशिप नहीं हुई है। चैंपियनशिप के आयोजन पर फेडरेशन दो फाड़ हो गई है।
विरोध जताने वाले एक राज्य संघ के पदाधिकारी का कहना है कि जब आईबा की ओर से फेडरेशन पर प्रतिबंध लगा रखा गया और हाल ही में उसने अपने झंडे तले भारतीय बॉक्सरों को अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में खेलने की अनुमति दी है, ऐसे में इस तरह का जोखिम लेने की क्या जरूरत है। आईबा ने साफ कह रखा है कि चुनाव के बाद नई फेडरेशन गतिविधियां शुरू करेगी। लेकिन न तो नए चुनाव कराए जा रहे हैं और न ही प्रतिबंध हट रहा है। चैंपियनशिप कराने पर आईबा ने अपनी आंखें तरेरीं तो भारतीय बॉक्सरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने से हाथ धोना पड़ सकता है।
वहीं एआईबीएफ के सेक्रेटरी जनरल राजेश भंडारी का कहना है कि नेशनल चैंपियनशिप नहीं कराने से और ज्यादा नुकसान है। चैंपियनशिप नहीं कराएंगे तो टीमों का चयन किस आधार पर होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए 18 मई से नेशनल चैंपियनशिप घोषित की गई है।