खेल जगत को हिला देने वाले ड्रग्स मामले के आरोपी ओलंपिक पदक विजेता विजेंदर सिंह डोप टेस्ट के लिए सैंपल देने को तैयार हो गए हैं। हालांकि उन्होंने खेल मंत्रालय को यह भी साफ कर दिया कि वह सिर्फ अपने मूत्र का सैंपल देंगे, बालों का नहीं।
इससे पहले मंत्रालय ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) को विजेंदर का डोप टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि बाद में मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह साफ कर दिया कि उसने नाडा से विजेंदर का सैंपल के लिए कहा जरूर है, लेकिन यह नाडा के ऊपर है कि वह यह आदेश मानती है या नहीं। नाडा अगर विजेंदर का सैंपल लेने से इंकार कर देती है तो वह इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।
मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक विजेंदर ने उनसे नाडा को अपना सैंपल दिए जाने के लिए हामी भर दी है। यह टेस्ट आउट ऑफ कंपटीशन ही होगा। हालांकि विजेंदर ने पंजाब पुलिस को पूछताछ के दौरान अपना ब्लड व बालों का सैंपल दिए जाने से इंकार कर दिया था। मगर वह नाडा को अपना मूत्र सैंपल देने के लिए तैयार हो गए हैं।
इससे पहले नाडा महानिदेशक को निर्देश देते हुए मंत्रालय ने कहा था कि मीडिया में इस बात की खबरें छपी हैं कि विजेंदर ने कथित रूप से हेरोइन का सेवन किया है। एक खेल आइकन के संदर्भ में ऐसी खबरें जनमानस को हिला देने वाली हैं और इनका देश के अन्य खिलाड़ियों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।
इन खबरों के मद्देनजर यह जरूरी हो जाता है कि नाडा विजेंदर का हेरोइन के कथित सेवन के लिए टेस्ट कराए, चाहे वह प्रतियोगिता से बाहर टेस्ट क्यों न हो। यह टेस्ट जल्द से जल्द होना चाहिए और इसकी सूचना तत्काल मंत्रालय को दी जानी चाहिए।
नाडा की मुश्किल
वाडा नियमों के मुताबिक उसे या उसके किसी भी संगठन को किसी एक तरह के ड्रग्स का नाम बताकर या फिर किसी भी खिलाड़ी की पहचान बताकर न तो टेस्ट कराया जा सकता है और न ही सैंपल लिया जा सकता है। नाडा अगर मंत्रालय का निर्देश मानती है तो उसे वाडा की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्य कोच गुरबख्श सिंह संधू का कहना है कि विजेंदर को जांच में सहयोग करते हुए अपने खून व बालों का सैंपल दे देना चाहिए, ताकि पुलिस इनकी जांच किसी मान्यता प्राप्त स्पोर्ट्स एजेंसी से कराकर मामले की तह तक पहुंच सके।