भारत ने गुरुवार को चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ खिलाड़ियों को नत्थी वीजा जारी करने को अस्वीकार्य बताया था और कहा था कि वह इस तरह के कदमों पर "उचित प्रतिक्रिया" देने का अधिकार रखता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि भारत पहले ही इस मामले पर चीनी पक्ष के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज करा चुका है और भारतीय नागरिकों के लिए वीजा व्यवस्था में अधिवास या जातीयता के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
थरूर ने ट्वीट कर लिखा- अब बहुत हो गया। अपने खिलाड़ियों और चीनी वीजा चाहने वाले हर दूसरे अरुणाचलवासी को निराश करने की बजाय, हमें तिब्बत से भारतीय वीजा के लिए आवेदन करने वाले किसी भी व्यक्ति को खुद से नत्थी वीजा जारी करना शुरू कर देना चाहिए। हमें यह भी कहना चाहिए कि जब तक तिब्बत और भारत के बीच विवादित सीमा का समाधान नहीं हो जाता, हम ऐसा करना जारी रखेंगे।
भारतीय वुशू टीम के साथ नत्थी वीजा का क्या है मामला?
चीन के चेंगजू शहर में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स की वुशू टूर्नामेंट में शिरकत करने के लिए 12 लोगों की टीम को जाना था। इसमें आठ खिलाड़ी के अलावा एक कोच और तीन स्टाफ शामिल थे। इस टीम में अरुणाचल प्रदेश के तीन खिलाड़ी नैयमन वांग्सू, ओनिलू तेगा और मेपुंग लामगू शामिल थे। सभी खिलाड़ियों के वीजा के लिए 16 जुलाई को आवेदन दिया गया था।
बाकी खिलाड़ियों के लिए चीन ने समय से वीजा जारी कर दिया, लेकिन अरुणाचल के तीनों खिलाड़ियों के दस्तावेज चीनी दूतावास ने स्वीकार नहीं किए। तीनों खिलाड़ियों को मंगलवार को दोबारा दस्तावेज दाखिल करने के लिए कहा गया।
इसके बाद दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने उनके पासपोर्ट बुधवार को नत्थी वीजा के साथ वापस कर दिए। केंद्र सरकार तक पूरा मुद्दा पहुंचने के बाद पूरी 12 लोगों की वुशू टीम को रोक लिया गया। उन्हें रात ढाई बजे दिल्ली एयरपोर्ट से वापस लौटा दिया गया। हालांकि, बाकी खेलों के भारतीय खिलाड़ी चीन के लिए रवाना हो चुके हैं।
चीन भारत के दो राज्यों अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लोगों को नत्थी वीजा जारी करता है। हालांकि, चीन यही नीति भारत के अन्य राज्यों के लिए लागू नहीं करता। चीन की यह मानसिकता है कि वह अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत का हिस्सा मानता है और तिब्बत पर चीन का अधिकार है। ऐसे में चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश को अपने देश का हिस्सा मानता है। चीन उन इलाकों को भारत का हिस्सा नहीं मानता है, जिनके लिए वह स्टेपल वीजा जारी कर रहा है। अरुणाचल प्रदेश के अलावा इसमें जम्मू-कश्मीर का भी नाम है। भारत इसको लेकर कई बार आपत्ति जता चुका है, लेकिन चीन ने अपनी कूटनीति नहीं बदली। वह भारत के साथ अपने विवाद को कायम रखना चाहता है।