फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुशील की सिफारिश फिर भी नहीं माने सतपाल

Sat, 30 Mar 2013 11:54 PM IST
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
विज्ञापन
विज्ञापन
ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त का कोच होने की कीमत आखिर द्रोणाचार्य अवॉर्डी यशवीर सिंह को चुकानी पड़ी।
विज्ञापन


सुशील का कोच कहलाने की लड़ाई में 1982 के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और दिल्ली खेल विभाग के उप निदेशक सतपाल का धोबी पटका एक बार फिर उन पर भारी पड़ा है।

सतपाल ने यशवीर को कैंप में शामिल किए जाने की भारतीय कुश्ती संघ से की गई सुशील कुमार की सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया। दामाद की सिफारिश के बावजूद सतपाल ने यशवीर को कैंप के लिए छोड़ने से इंकार कर दिया।
विज्ञापन


लंदन ओलंपिक के बाद यशवीर को द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिलने के बावजूद उन्हें कैंप में आश्चर्यजनक रूप से शामिल नहीं किया गया। कुश्ती संघ का तर्क था कि दिल्ली खेल विभाग में सतपाल के नीचे काम करने वाले यशवीर को कैंप के लिए छोड़ने से इंकार कर दिया गया था।

यही नहीं उन्हें छत्रसाल स्टेडियम से हटाकर बवाना भेज दिया गया। मगर कुछ दिन पूर्व सीआईएसएफ ने सोनीपत में चल रहे कैंप में शामिल अपने दो प्रशिक्षकों में से एक को कैंप छोड़ने के लिए कहा, जिससे एक कोच की जगह खाली हो गई। संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक सुशील ने यशवीर को शामिल करने की सिफारिश की।

इसके बाद अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सेक्रेटरी जनरल राज सिंह ने उन्हें कैंप में शामिल किए जाने की सिफारिश साई से की। साई तत्काल हरी झंडी देकर इस कोच को कैंप में शामिल करने के आदेश निकाल दिए। फेडरेशन ने सतपाल से जब यशवीर को कैंप के लिए छोड़ने की बात की तो उन्होंने इंकार कर दिया। साई का आदेश निकले एक सप्ताह से ऊपर हो गया है।
विज्ञापन


सतपाल का कहना है कि यशवीर को कैंप में शामिल किए जाने के लिए सुशील की ओर से सिफारिश जरूर की गई है, लेकिन अब उनकी रणनीति सेंटर के दूसरे प्रशिक्षकों को आगे लाने की है। जबकि यशवीर और रामफल जैसे अनुभवी कोच अब अपने सेंटरों पर जूनियर पहलवानों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। उनका अनुभव जूनियरों के लिए फायदेमंद रहेगा। इसी को ध्यान में रख यशवीर कैंप के लिए नहीं छोड़े गए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें