मैं ही हूं पिता का बैंक बैलेंस
22 वर्षीय साक्षी कहती हैं कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, लेकिन माता-पिता हमेशा मेरे सपनों के साथ खड़े रहे। साक्षी भावुक होकर कहती हैं कि परिवार के पास जीरो बैंक बैलेंस है, लेकिन मेरे पिता से अगर आप पूछेंगे तो वह यही कहेंगे मेरा बैंक बैलेंस मेरे तीन बच्चे (दो बहनें, एक भाई) हैं। साक्षी कहती हैं कि अगर ऐसे मां-बाप हर घर में हों तो देश में ओलंपिक के पदकों की संख्या बढ़ जाएगी।
कई खेलों की राष्ट्रीय खिलाड़ी रही हैं साक्षी
साक्षी मार्शल आर्ट थांग्टा और अशटेडू अखाड़ा की राष्ट्रीय खिलाड़ी रही हैं। अशटेडू अखाड़ा में लगातार दो राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण जीते। वह जूडो, बेसबाल, सॉफ्टवाल की भी खिलाड़ी रहीं, लेकिन एनसीसी में उन्होंने 22 की राइफल पकड़ी तो उन्हें इसमें आनंद आया। उन्होंने 2021 में शूटिंग शुरू की और इस वर्ष सीनियर भारतीय टीम में जगह बना ली।