लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद खेल प्रमियों को सायना नेहवाल से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। लगभग दो महिने बाद सायना मैदान पर उतरेंगी और खेल प्रेमियों की उम्मीद भरी निगाहें उन पर होंगी। सायना डेनमार्क और फ्रांस के लिए निकल चुकी है और वह दो टूर्नामेंट खेलेंगी। भारत में महिला बैडमिंटन का पर्याय बन चुकी सायना नेहवाल को भी इस बात का पता है कि अब लोग उनसे ज्यादा उम्मीदें करने लगे है।
लेकिन एक खेल प्रेमी होने के नाते हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि खिलाड़ी को उसका स्वभाविक खेल खेलने दिया जाए ताकि वह अच्छा प्रदर्शन कर सके। अत्यधिक दवाब कई बार खिलाड़ी के खेल को प्रभावित कर देता है, सायना नेहवाल की प्रतिभा पर किसी को शक नहीं है लेकिन उम्मीदों का बोझ इतना नहीं बढ़ाना चाहिए कि खिलाड़ी अपने खेल को ही भूल जाए।
वैसे टूर्नामेंट में जाने के पहले सायना ने साफ कर दिया है कि उन्होंने दो माह का रेस्ट लिया और काफी अभ्यास किया है और वह इन प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तरह से तैयार है। सायना में आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं दिखी और हम उम्मीद कर सकते है कि वह भारतीय बैडमिंटन इतिहास को और मजबूत बनाएंगी।