क्रिकेटर और राज्य सभा सांसद सचिन तेंदुलकर ने भारतीय खेलों में सुनियोजित बदलाव की वकालत की है। उन्होंने कहा कहा कि अगर हम रियो में आयोजित होने वाले ओलंपिक में 12 पदक और 2020 में 20 पदक जीतना चाहते हैं तो बदलाव जरूरी है।
पिछले दिनों केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजकर सचिन ने शिक्षण संस्थानों में खेलों को शामिल करने की मांग की थी। सचिन का मानना है कि पाठयक्रम में खेलों को शामिल करने और इतिहास की किताबों में महान हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद जैस खिलाड़ियों की उपलब्धियों को शामिल करने से उन खेलों के प्रति जुनून बढ़ाने में मदद मिलेगी जिनका विकास कम हुआ है।
सचिन ने मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को पत्र लिखकर कहा कि 1951 में पंडित नेहरू द्वारा एशियाई खेलों की संस्था को प्रोत्साहित किया जाना, भारतीय राष्ट्रीय गाथा का अभिन्न हिस्सा है, हमारे छात्रों को इसे पढ़ना चाहिए। इससे दिल्ली के बनने में मदद मिली, इसी तरह 1982 एशियाड और 2010 राष्ट्रमंडल खेलों से भी ऐसा ही हुआ।
सचिन के मुताबिक भारत में खेल अब भी शुरुआती दौर में हैं। उन्होंने कहा, मैं कहना चाहता हूं कि लंदन की सफलता के आधार पर आगे बढ़ने का समय आ गया है, हमें खेलों में बड़ा कदम उठाना चाहिए। अगर हम उचित तरीके से इस लय को बढ़ाए और कुछ मौलिक परिवर्तन ले आएं तो रियो में 12 पदक या 2020 में 20 पदक सिर्फ सपना ही नहीं होगा।
तेंदुलकर ने तीन पेज के इस पत्र में अपने उद्देश्य लिखे, इसमें उन्होंने बेंगलूरु में राष्ट्रीय क्रिकेट अकैडमी की तर्ज पर ओलंपिक खेलों के लिए विशेष रूप से पूर्ण सुविधाओं से लैस स्कूलों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से कुश्ती और मुक्केबाजी में मदद मिलेगी।
क्या दिए सुझाव
पाठ्यक्रम की किताबों में खेलों की उपलब्धियों को शामिल किया जाए।
एशियन गेम्स के बारे में भी बच्चों को पढ़ाया जाए।
विभिन्न ओलंपिक स्पर्धाओं के लिए अत्याधुनिक स्कूल खोले जाएं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स म्यूजियम बनें।
भारत में भी अमेरिका जैसा खेल तंत्र हो।
खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने में मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जाए।