'मैं खिलाड़ियों की दुर्दशा से दुखी हूं'
समाचार एजेंसी एएनाई के साथ एक विशेष साक्षात्कार में गोपीचंद ने जीरो से हीरो बनने की राह में खिलाड़ियों को किन कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है, इसकी हकीकत साझा की। उन्होंने कहा- मैं खिलाड़ियों को दिन-प्रतिदिन असफल होते देखता हूं। मेरा दिल उनके लिए दुखी है। आज जब मैं राष्ट्रीय चैंपियनों को देखता हूं, जब मैं राष्ट्रमंडल पदक विजेताओं को देखता हूं, जब मैं एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को देखता हूं इन सभी के पास नौकरी नहीं है। मुझे दुख होता है कि उनका भविष्य क्या है? लेकिन मुझे पता है कि सौ लोगों में से कोई एक सफल हो सकता है। तो सुरक्षा जाल कहां है? और मुझे बस इसी बात की चिंता है।