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Pullela Gopichand: 'खिलाड़ियों को असफल होता देखकर दिल दुखी होता है', बैडमिंटन के द्रोणाचार्य का भावुक बयान

Tue, 25 Feb 2025 10:45 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बैडमिंटन मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने खेल जगत की कड़वी सच्चाई सभी के सामने बयां कर दी है। उन्होंने भावुक होते हुए युवाओं को सलाह दी कि खेलों को तभी अपना करियर बनाएं जब उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न हो। 
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पुलेला गोपीचंद - फोटो : ANI
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विस्तार
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खेल की दुनिया में करोड़ों युवा हर रोज अपनी किस्मत आजमाते हैं। कुछ बुलंदियों को छू भी लेते हैं और कुछ गुमनामी की जिंदगी गुजारते रहते हैं। बैडमिंटन मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने खेल जगत की कड़वी सच्चाई सभी के सामने बयां कर दी है। उन्होंने भावुक होते हुए युवाओं को सलाह दी कि खेलों को तभी अपना करियर बनाएं जब उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न हो। 
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'मैं खिलाड़ियों की दुर्दशा से दुखी हूं'
समाचार एजेंसी एएनाई के साथ एक विशेष साक्षात्कार में गोपीचंद ने जीरो से हीरो बनने की राह में खिलाड़ियों को किन कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है, इसकी हकीकत साझा की। उन्होंने कहा- मैं खिलाड़ियों को दिन-प्रतिदिन असफल होते देखता हूं। मेरा दिल उनके लिए दुखी है। आज जब मैं राष्ट्रीय चैंपियनों को देखता हूं, जब मैं राष्ट्रमंडल पदक विजेताओं को देखता हूं, जब मैं एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को देखता हूं इन सभी के पास नौकरी नहीं है। मुझे दुख होता है कि उनका भविष्य क्या है? लेकिन मुझे पता है कि सौ लोगों में से कोई एक सफल हो सकता है। तो सुरक्षा जाल कहां है? और मुझे बस इसी बात की चिंता है।
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इन दिक्कतों से जूझते हैं खिलाड़ी
पुलेला ने खिलाड़ियों के जीवन में आने वाली दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि 50 की उम्र में जब आके बच्चे पूछते हैं कि आपने क्या कमाया तो आपके पास कहने को कुछ नहीं होता है। उन्होंने आगे कहा- नौकरियां इसका जवाब नहीं हैं। उन्हें कौशल प्रदान करें, उन्हें शिक्षित करें, उनका मार्गदर्शन करें। उन्होंने खेल के वर्षों से परे स्थायी करियर योजना की आवश्यकता पर बल दिया। क्योंकि लोग थोड़े समय के लिए आते हैं। उनका विचार अगला ओलंपिक है। उनका विचार छोटा, छोटा, छोटा है और यह एक लंबा मुद्दा है। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। 35 की उम्र में, जब आप सभी एक ही उम्र के होते हैं तो आप शायद उनसे बेहतर होते हैं। आपके पास उनसे बड़ी कार होती है, इससे कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन 50 की उम्र में, जब आप अपने बच्चे से कहते हैं, मैं एक ओलंपियन हूं तो वह कहता है, आप किस बारे में बात कर रहे हो? आपने कुछ भी नहीं कमाया। तुम्हारे पास कोई सम्मान नहीं है। तुम्हारा अधिकारी तुम्हें बुलाता है, सर, मैं क्या करूं? हर बार जब आपको... किसी अधिकारी के साथ ऐसा करना पड़ता है तो इससे तुम्हें दुख होता है और यह दुख अगली पीढ़ी को खेल में शामिल होने से रोकेगा।
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