ओलंपिक की एथलेटिक्स स्पर्धा में पदक के लिए तरस रहे भारत के प्रदर्शन पर भले ही कई प्रश्नचिन्ह लगे हो, लेकिन उड़नपरी पीटी ऊषा की मानें तो इस समस्या के पीछे और भी कई कारण हैं। लखनऊ में चल रही जूनियर नेशनल एथलेटिक्स मीट में बतौर मेहमान आई ट्रैक क्वीन ने अमर उजाला से खास बातचीत में भारत के एथलेटिक्स में पिछड़ेपन पर खुलकर बातचीत की।
ऊषा कहती हैं कि मेरे विचार से ओलंपिक में एथलेटिक्स ही ऐसा इवेंट है, जिसमें पदक जीतना अन्य स्पर्धाओं की तुलना में काफी कठिन है। शायद भारतीय एथलीट इस दबाव को सह नहीं पाते और पदक से दूर रह जाते हैं। एक और प्रमुख कारण के तहत हमारे यहां एक समय में एक ही खिलाड़ी छाया रहता है। कंपटीशन न मिल पाने के कारण वे खुद को श्रेष्ठ मान लेते हैं, लेकिन विदेश में जाते ही पिछड़ जाते हैं।
एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं भी न मिल पाना बड़ा कारण है। लंदन ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन पर संतुष्टि जताते हुए उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद हमारे खिलाड़ी खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित करने में सफल हुए। दो एथलीटों (विकास गौड़ा और कृष्णा पुनिया) फाइनल में पहुंचें। पैदल चाल में इरफान ने दसवां स्थान हासिल करके भविष्य के लिए शुभ संकेत दिए। साथ ही टिंटू लूका का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा।
अगले ओलंपिक में ये दोनों खिलाड़ी पदक जीतने का मद्दा रखते हैं। स्पोर्ट्स कॉलेज में चल रही नेशनल चैंपियनशिप में फारमेट पर नाखुशी जताते हुए पूर्व स्टार एथलीट बोली, एक ही दिन में हीट्स और फाइनल होना कतई तर्कसंगत नहीं है। इससे खिलाड़ी की क्षमता कम हो जाती है।
उदाहरण के तौर पर रविवार को बालिका 800 मीटर की दौड़ को ही लीजिए, जिसमें चार घंटे के भीतर हीट्स और फाइनल को आयोजित कर डाला बया। अगर फाइनल हीट्स हीट अगले दिन होती तो मैं दावा कर सकती हूं कि इसमें स्वर्ण जीतने वाली जैसी जोसफ अपनी सीनियर एथलीट टिंटू लूका के रिकॉर्ड को तोड़ देती।
स्कूल के लिए पुलिस की नौकरी छोड़ी
आमतौर पर ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि पत्नी के सपने को पूरा करने के लिए पति नौकरी तक छोड़ देते हैं, लेकिन पीटी ऊषा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ जब पति श्रीनिवासन ने पत्नी द्वारा बनाए एथलेटिक्स स्कूल के संचालन के लिए पुलिस की नौकरी कुर्बान कर दी।
श्रीनिवासन बताते हैं कालीकट में ऊषा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स के संचालन का जिम्मा मेरे कंधे पर है, जबकि ऊषा एथलीटों की ट्रेनिंग देती हैं। स्कूल में इस समय देश के चुनिंदा 17 एथलीट हैं, जिसमें पहले बैच से आई ओलंपियन टिंटू लूका, अश्वदी मोहन, शिल्पा और जैसी जोसफ जैसी अंतरराष्ट्रीय एथलीट हैं। ऊषा की ख्वाहिश है कि इस स्कूल से ओलंपिक में पदक जीतने वाला एथलीट निकले, जिससे उनका ओलंपिक में पदक न जीत पाने के गम कुछ हल्का हो।