रियो ओलंपिक से ठीक पहले विदेश खेलने जाने वाली भारतीय टीमों के होने वाले प्री डिपार्चर डोप टेस्ट बंद कर दिए गए हैं। नाडा ने वाडा कोड 2015 का हवाला दे खेल संघों को ये टेस्ट करने से इंकार कर दिया है।
हालांकि वाडा कोड 2009 की अनदेखी कर देश को किरकिरी से बचाने के लिए सालों से नाडा प्री डिपार्चर डोप टेस्ट करता आ रहा है। कई मौकों पर इन टेस्टों में फंसने वाले खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय कंपटीशनों में भेजने से रोका जा चुका है, लेकिन ओलंपिक सिर पर है और अब सभी खेलों की टीमें यह टेस्ट कराए बिना विदेश खेलने जा रही हैं।
इससे ओलंपिक और विदेशी टूर्नामेंटों में भारतीय खिलाड़ियों के डोप में फंसने का खतरा बढ़ गया है।
वाडा कोड 2009 के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में जाने से पहले देश में कराए जाने वाले प्री डिपार्चर टेस्ट अवैध माने जाते हैं, लेकिन डोप पॉजिटिव केसों की बढ़ती संख्या के चलते सभी टीमों को हिदायत जारी की जा रही थी कि वे अपने खिलाड़ियों का डोप टेस्ट कराकर उनकी जांच कर लें।
2015 के वाडा कोड में प्री डिपार्चर टेस्ट को पूरी तरह अवैध करार दिया गया। सूत्र बताते हैं कि नाडा को लगा कि इसका खुलासा वाडा को हुआ तो एजेंसी पर प्रतिबंध लग सकता है। इसके बाद नाडा ने सभी खेल संघों को कहा अब यह टेस्ट नहीं होंगे।
साई खुद कहता है ये टेस्ट कराने को
अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में टीम भेजने के निकाले जाने वाले दस्तावेज में साई खुद ये डोप टेस्ट कराने को कहता है। खेल संघों से कहा जाता कि टीम भेजने से पहले ये डोप टेस्ट अनिवार्य हैं। साई अभी भी इन आदेशों को निकाल रही है।