प्रशांत कर्माकर का नाम लोग भूले नहीं होंगे। इस विकलांग तैराक का नाम दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में रजत और पैरा एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतकर सुर्खियों में आया था। तैराकी में अपना लोहा मनवाने के बाद कर्माकर तैराकी छोड़ साइकिलिंग में हाथ आजमाने जा रहे हैं।
कर्माकर एशियाई चैंपियनशिप में रोड रेस में दौड़ने के लिए कमर कस चुके हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इतनी उपलब्धियां दर्ज करने के बाद कर्माकर आज भी बेरोजगार हैं। वैसे तो यह खिलाड़ी पश्चिम बंगाल का है लेकिन नौकरी का आश्वासन मिलने पर उन्होंनें हरियाणा का दामन थाम लिया।
खेल विभाग में उन्हें बतौर सहायक कोच नौकरी देने के लिए राज्य सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव भी पास कर दिया है। लेकिन बाहरी होने के चलते इस प्रस्ताव को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वह अभी भी हरियाणा का प्रतिनिधत्व कर रहे हैं लेकिन नियुक्ति पत्र का उन्हें अभी भी इंतजार है।
कर्माकर कहते हैं कि उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा पर भरोसा है। उन्हें नौकरी मिल जानी चाहिए।