जम्मू एंड कश्मीर में आई विनाशकारी बाढ़ से आम जनजीवन काफी हद तक प्रभावित हो गया है। इस समय लोगों को जीने के लिए खासा संघर्ष करना पड़ रहा है क्योंकि बाढ़ ने पूरे राज्य में तबाही मचा रखी है।
राज्य में आपदा ने वहां के हर नागरिक के सामने जीने का संकट पैदा कर दिया है। इन्हीं में से एक हैं भारतीय क्रिकेटर परवेज रसूल, जो बड़ी मुश्किल से वहां से बच निकलने में कामयाब रहे।
बाढ़ के कहर के कारण रसूल 11 दिनों तक किसी से संपर्क नहीं कर सके और अनंतनाग के बिजबेहेरा स्थित अपने घर में बंधक की तरह फंसे रहे।
गले तक पहुंचे पानी के बावजूद लगा दी छलांग
सूबे में पानी के बढ़े हुए जलस्तर में भी परवेज रसूल का क्रिकेट प्रेम कम नहीं हुआ और अपने बैट और किट बैग को बचाने के लिए पानी में कूद गए।
25 वर्षीय ऑलराउंडर ने अपनी दास्तान सुनाते हुए कहा, "पिछले 11 दिनों से मैं सोसायटी से कटा हुआ हूं। टेलीफोन और मोबाइल भी काम नहीं कर रहा है। इंटरनेट कनेक्शन भी नहीं है और यह मेरे और मेरे परिवार के लिए बहुत लाचार कर देने वाली परिस्थितियां थी।"
उन्होंने आगे कहा, "अब मैं अपने सभी दोस्तों और रिश्तेदारों को सूचित करना चाहता हूं कि हम सभी सुरक्षित हैं। सबसे बुरी बात यह थी कि मेरा फेवरेट बैट और एक महंगा बैग मेरी कार में रह गया था। कार पानी में पूरी तरह से डूब चुकी थी और मेरी मां मेरे सीढ़ियों के नीचे जाने के खिलाफ थी। इसके बावजूद मैं गले तक डूबते हुए पानी में गया और दोनों चीजें निकालकर लाया।"
अपने टीम के साथियों से संपर्क नहीं कर सके
दोस्तों और रिश्तेदारों को अपनी सलामती की सूचना देने के लिए फिरकी गेंदबाज पवरेज रसूल को अपने घर से 2 किमी दूर जाना पड़ा।
उन्होंने कहा, "मुझे अपनी सलामती की सूचना देने और मोबाइल का सिग्नल प्राप्त करने के लिए अपने घर से 2 किमी दूर जाना पड़ा। मैं जानता था कि यह अफवाहें हैं कि बाढ़ के कारण मेरे और मेरे परिवार का पता नहीं चल पा रहा है। यह गलत था। हां, यह सही है कि स्थितियां बहुत भयानक थी लेकिन अब अनंतनाग में स्थिति पहले से बेहतर हैं।"
रसूल ने कहा, "मैं अगले 2 दिनों में श्रीनगर आने की योजना बना रहा हूं। मैं अभी तक जम्मू एंड कश्मीर रणजी टीम के अपने साथियों से संपर्क नहीं कर पाया हूं।" आलराउंडर रसूल कश्मीर घाटी के पहले क्रिकेटर हैं जिन्हें टीम इंडिया में खेलने का मौका मिला।