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सुमित अंतिल की कहानी: सात साल की उम्र में पिता को खोया, हादसे में गंवाया पैर, अब पेरिस पैरालंपिक में जीता सोना

Mon, 02 Sep 2024 11:37 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस

सार

सुमित ने कभी हार नहीं मानी और बुलंद हौसले के साथ हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला किया। चेहरे पर मुस्कान रखने वाले सुमित ने न सिर्फ अपने से बड़ी तीन बहनों रेनू, सुशीला व किरण को हौसला दिया।
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सुमित अंतिल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत के स्टार भाला फेंक पैरा एथलीट सुमित अंतिल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पेरिस पैरालंपिक में पुरुष भाला फेंक एफ64 वर्ग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। सुमित ने दूसरे प्रयास में 70.59 मीटर का थ्रो किया जो उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो रहा। इतना ही नहीं सुमित का यह थ्रो पैरालंपिक का रिकॉर्ड है। सुमित इस तरह पैरालंपिक में अपने खिताब का बचाव करने में सफल रहे। सुमित के लिए हालांकि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। उनका सफर कठिनाइयों भरा रहा है। 2015 में हुए सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। 
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सुमित अंतिल - फोटो : antil_sumit7698
टोक्यो में स्वर्ण जीतकर परिवार को दिया खुश होने का मौका
सुमित ने कभी हार नहीं मानी और बुलंद हौसले के साथ हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला किया। चेहरे पर मुस्कान रखने वाले सुमित ने न सिर्फ अपने से बड़ी तीन बहनों रेनू, सुशीला व किरण को हौसला दिया, बल्कि इकलौते बेटे के साथ हुए हादसे से दुखी मां निर्मला देवी को भी कहा, मां रो मत, मैं आपको जीवन की हर खुशी दूंगा। सुमित ने अपनी कही बात को सच कर दिखाया और कड़ी मेहनत से टोक्यो पैरालंपिक में गोल्ड जीतकर मां व बहनों को गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किया।

सुमित अंतिल - फोटो : antil_sumit7698
छोटी उम्र में सिर से उठा पिता का साया
सुमित आंतिल का जन्म सात जून 1998 को हुआ था। तीन बहनों के इकलौते भाई ने परिवार की कमी को पूरा कर दिया। सुमित जब सात साल के थे, तब एयरफोर्स में तैनात पिता रामकुमार की बीमारी से मौत हो गई। पिता का साया उठने के बाद मां निर्मला ने हर दुख सहन करते हुए चारों बच्चों का पालन-पोषण किया। 

सुमित अंतिल - फोटो : antil_sumit7698
हादसे ने बदल दी जिंदगी
निर्मला देवी ने बताया कि सुमित जब 12वीं कक्षा में था, कॉमर्स का ट्यूशन लेता था। 5 जनवरी 2015 की शाम को वह ट्यूशन लेकर बाइक से वापस आ रहा था, तभी सीमेंट के कट्टों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने सुमित को टक्कर मार दी और काफी दूर तक घसीटते ले गई। इस हादसे में सुमित को अपना एक पैर गंवाना पड़ा।  
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सुमित अंतिल - फोटो : antil_sumit7698
संघर्षों के बावजूद नहीं मानी हार
निर्मला देवी ने बताया कि हादसे के बावजूद सुमित कभी उदास नहीं हुआ। रिश्तेदारों व दोस्तों की प्रेरणा से सुमित ने खेलों की तरफ ध्यान दिया और साई सेंटर पहुंचा। जहां एशियन रजत पदक विजेता कोच विरेंद्र धनखड़ ने सुमित का मार्गदर्शन किया और उसे लेकर दिल्ली पहुंचे। यहां द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच नवल सिंह से जैवलिन थ्रो के गुर सीखे। सुमित ने वर्ष 2018 में एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया, लेकिन पांचवीं रैंक ही प्राप्त कर सका। वर्ष 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। इसी वर्ष हुए नेशनल गेम में सुमित ने स्वर्ण पदक जीत खुद को साबित किया। 
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