10 मीटर एयर पिस्टल का कांस्य पदक जीतने के बाद मनु भाकर के लिए सोमवार एकदम नया दिन था। उनका सारा ध्यान मिश्रित स्पर्धा के एक और पदक पर था। पेरिस से मनु ने अमर उजाला से कहा, कल तक पदक की बेहद खुशी थी, खुशी आज भी है, लेकिन मैं सामान्य हूं। कुछ भी बदला नहीं लग रहा है, क्यों कि उनके सामने अभी दो स्पर्धाएं और हैं। उनका सारा ध्यान इन्हीं स्पर्धाओं पर है।
मिश्रित स्पर्धा के क्वालिफाइंग के दौरान कुछ उतार-चढ़ाव आए। यह और अच्छा हो सकता था, लेकिन वह अपने को मंगलवार को होने वाले फाइनल के लिए केंद्रित करना चाहती हैं। यही कारण है कि वह क्वालिफाइंग खत्म होने के कुछ देर बाद ही कोच जसपाल राणा के साथ एक बार फिर तैयारियों में जुट गईं।
मनु भाकर
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खुद के श्रेष्ठ पर ध्यान
मनु के लिए मिश्रित स्पर्धा नई नहीं हैं। उनके और सौरभ के नाम इस स्पर्धा के क्वालिफाइंग दौर का ओलंपिक और विश्व रिकॉर्ड है। मनु के मुताबिक मिश्रित स्पर्धा के लिए साथी के साथ तालमेल की कोई खास जरूरत नहीं पड़ती है। यहां भी अपना व्यक्तिगत खेल खेलना होता है। उनकी और साथी की कोशिश यही रहती है कि दोनों श्रेष्ठ दें, जिससे टीम का अच्छा स्कोर आए।
मनु भाकर
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अपने को हर चीज के लिए तैयार कर लेती हैं
मानसिक मजबूत के लिए आध्यात्म और गीता का सहारा लेने वाली मनु के मुताबिक वह शूटिंग के दौरान ज्यादा नहीं सोचती हैं। मैच में शूटिंग करने से पहले वह अपने आपको यह समझा लेती हैं कि अगर पदक आया तो अच्छी बात है। अगर पदक नहीं भी आया तो भी वह इसे स्वीकारने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहती हैं।