अजीत सिंह का जन्म 1993 में इटावा उत्तर प्रदेश में हुआ था । वह फिलहाल मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पढ़ाई कर रहे हैं । 2017 में अपने दोस्त को बचाते हुए एक ट्रेन दुर्घटना का शिकार हुए थे। नतीजतन वह कोहनी के नीचे अपना बायां हाथ खो चुके हैं। दुर्घटना के लगभग चार महीने बाद रिकवरी और रिहैब चरण के दौरान उन्होंने हरियाणा के पंचकुला में पैरा एथलेटिक सीनियर नेशनल 2018 में भाग लिया।
उन्हें टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना के तहत भारतीय खेल प्राधिकरण भारत सरकार के कार्यक्रम में शामिल किया गया था और ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट द्वारा भी उनका समर्थन किया गया। वह फिलहाल ग्वालियर से शारीरिक शिक्षा और खेल में पीएचडी कर रहे हैं। पैरा जेवलिन के खेल को अपनाने के बाद उन्होंने 2019 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया। उन्होंने बीजिंग में आयोजित सातवें विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में भाग लिया और भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने दुबई में 2019 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वहां उन्होंने कांस्य पदक जीता। अजीत ने 2020 ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई किया। उन्होंने 2021 विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में भी स्वर्ण पदक जीता था।
इसके अलावा तेलंगाना की दीप्ति जीवनजी ने 400 मीटर दौड़ में 55.82 सेकंड के साथ कांस्य जीता। इससे पहले पुरुषों की ऊंची कूद टी 63 वर्ग स्पर्धा में मंगलवार को भारतीय पैरा एथलीट्स ने रजत और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। देर रात हुए फाइनल मुकाबले में हाई जंपर शरद कुमार ने 1.88 मीटर की दूरी तय कर सिल्वर मेडल जीता। मरियप्पन थंगावेलु ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हुए 1.85 मीटर की दूरी तय की। उन्हें कांस्य पद दिया गया। मंगलवार को भारतीय एथलीट्स ने कमाल करते हुए पांच पदक जीते। इसके साथ ही भारत ने अपने ही रिकॉर्ड को चूर-चूर किया है, जो टोक्यो पैरालंपिक खेलों में बनाया था।