भारतीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी नितेश कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सोमवार को पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने ब्रिटिश पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी डैनियल बेथेल को पुरुष एकल एसएल3 वर्ग के पदक मुकाबले में 21-14, 18-21, 23-21 के स्कोर से हरा दिया। इस मुकाबले का पहला गेम नितेश ने 21-14 से जीता। हालांकि, वह दूसरे गेम में पिछड़ गए और बेथेल ने यह गेम 18-21 से अपने नाम किया। तीसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच काफी कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने मिली और एक समय स्कोर 20-20 पर पहुंच गया था। हालांकि, नितेश ने 23-21 से यह गेम जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
भारत का पेरिस पैरालंपिक में यह कुल नौवां और दूसरा स्वर्ण पदक है। नितेश से पहले महिला निशानेबाज अवनि लेखरा भी स्वर्ण जीतने में सफल रही थीं। नितेश की जीत के साथ एसएल3 वर्ग का स्वर्ण पदक भारत के पास बरकरार रहा। टोक्यो में तीन साल पहले जब पैरा बैडमिंटन ने पदार्पण किया था तो प्रमोद भगत ने इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था।
एसएल3 वर्ग के खिलाड़ियों के शरीर के निचले हिस्से में अधिक गंभीर विकार होता है और वह आधी चौड़ाई वाले कोर्ट पर खेलते हैं। जब नितेश 15 वर्ष के थे तब उन्होंने 2009 में विशाखापत्तनम में एक रेल दुर्घटना में अपना बायां पैर खो दिया था लेकिन वह इस सदमे से उबर गए और पैरा बैडमिंटन को अपनाया।
आईआईटी मंडी से स्नातक नितेश ने इससे पहले बेथेल के खिलाफ सभी नौ मैच गंवाए थे और उन्होंने सोमवार को ग्रेट ब्रिटेन के खिलाड़ी के खिलाफ पहली जीत दर्ज की। फाइनल मुकाबला धीरज और कौशल का परीक्षण था जिसमें दोनों खिलाड़ियों ने बहुत ही कठिन रैलियां खेली। शुरुआती गेम में लगभग तीन मिनट की 122 शॉट् की रैली भी थी। नितेश ने अपने रिवर्स हिट, ड्रॉप शॉट और नेट पर शानदार खेल से बेथेल को पूरे मैच में परेशान किया।
नितेश-बेथेल के बीच हुआ रोमांचक मुकाबला
शुरुआती गेम में नितेश एक समय 6-9 से पीछे थे लेकिन अपने मजबूत डिफेंस की बदौलत वापसी करने में सफल रहे और ब्रेक के समय 11-9 से आगे थे। उन्होंने इसके बाद 18-14 की बढ़त बनाई और बेथेल के शॉट बाहर मारने पर गेम जीत लिया। भारतीय खिलाड़ी दूसरे गेम में 14-12 से आगे था और सीधे गेम में जीत दर्ज कर सकता था लेकिन बेथेल ने वापसी करते हुए मुकाबले को तीसरे और निर्णायक गेम में खींच दिया। तीसरे और निर्णायक गेम दोनों खिलाड़ियों के बीच प्रत्येक अंक के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दोनों खिलाड़ी 8-8 के स्कोर से 19-19 तक पहुंचे। भारतीय खिलाड़ी को 20-19 के स्कोर पर पहला चैंपियनशिप प्वाइंट मिला लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाया। बेथेल को भी 21-20 के स्कोर पर चैंपियनशिप प्वाइंट मिला लेकिन वह भी शॉट नेट पर मार बैठे। नितेश ने इसके बाद दूसरे चैंपियनशिप प्वाइंट पर बेथेल के शॉट बाहर मारने पर स्वर्ण पदक जीता।
नितेश ने फरीदाबाद में 2016 के राष्ट्रीय खेलों में पैरा बैडमिंटन में पदार्पण किया जहां उन्होंने कांस्य पदक जीता। वैश्विक स्तर पर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 2022 में एशियाई पैरा खेलों में एकल में रजत सहित तीन पदक जीते।
नितेश ने कहा, मैंने इस तरह से नहीं सोचा था। मेरे दिमाग में विचार आ रहे थे कि मैं कैसे जीतूंगा। लेकिन मैं यह नहीं सोच रहा था कि जीतने के बाद मैं क्या करूंगा। मैंने उसके खिलाफ ऐसी परिस्थितियों में हार का सामना किया है और मैं वही गलतियां दोहराना नहीं चाहता था। मैंने पहले भी अपना संयम खो दिया था इसलिए मैंने खुद से कहा कि मुझे हर अंक के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए। निर्णायक गेम में 19-20 के स्कोर पर भी मैंने खुद से कहा कि मैं डटा रहूं और उसे अंक के लिए मेहनत करने दूं।
उन्होंने कहा, मैं आमतौर पर इतने धैर्य के साथ नहीं खेलता और अपने स्ट्रोक पर भरोसा करता हूं। लेकिन जब मैंने यहां पहले गेम में शुरुआत की तो मैंने योजना बनाई कि मुझे सहज होने के लिए पहले कुछ अंक अच्छी तरह खेलने होंगे। फिर मैं अपने स्ट्रोक खेल सकता हूं और मैं देख सकता था कि वह हताश था। लेकिन परिस्थितियों के कारण मैंने बहुत अधिक विविधता नहीं आजमाई, बस स्थिर खेल खेलने की कोशिश की।