भारत के किशोर पैरा तैराक रवि बुडिगिना ने गुरुवार को पैरा एशियन गेम्स में पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस13 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पदकों की हैट्रिक पूरी की। दो अन्य भारतीय तैराकों ने भी पदक जीते। रवि इससे पहले इस सप्ताह पुरुषों की एस13 वर्ग की 100 मीटर बैकस्ट्रोक और फ्रीस्टाइल स्पर्धाओं में भी रजत पदक जीत चुके हैं। आंध्र प्रदेश के दृष्टिबाधित 18 वर्षीय रवि ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 25.89 सेकेंड का समय लेकर तीसरा स्थान हासिल किया।
कपिल और स्वातिक ने दिलाए पदक
कपिल कुमार और स्वातिक पाटिल ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीता। 26 वर्ष के कपिल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस10 स्पर्धा में चार मिनट 38.44 सेकेंड का समय लिया। जापान के अकितो मिनाइ ने एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड समय (चार मिनट 27.44 सेकेंड) के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। ईरान के शाहीन इजादयार को कांस्य पदक मिला। एस10 श्रेणी में वे तैराक होते हैं जिनमें आमतौर पर शारीरिक कमियां बहुत कम होती हैं मसलन पैरों में कमजोरी, पैर न होना, घुटने के नीचे से पैर नहीं होना, या कूल्हों से जुड़ी समस्याएं।
इसके बाद 24 वर्षीय स्वातिक ने पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी9 स्पर्धा में एक मिनट 13.77 सेकेंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। स्वातिक ईरान के दो तैराकों सिना जेघमिनेजाद (एक मिनट 09.47 सेकेंड) और शाहीन इजादयार (एक मिनट 13.23 सेकेंड) के बाद तीसरे स्थान पर रहे। दोनों ईरानी तैराकों ने क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक जीते। एसबी9 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिनमें शारीरिक अक्षमता सबसे कम होती है। शारीरिक अक्षमता के वर्गीकरण में इस वर्ग के खिलाड़ियों की क्षमता सबसे अधिक मानी जाती है। पैरालंपिक तैराकी में एस, एसबी और एसएम उपसर्ग तैराकी की अलग-अलग शैलियों को दर्शाते हैं। एस का इस्तेमाल फ्रीस्टाइल, बैकस्ट्रोक और बटरफ्लाई स्पर्धाओं के लिए, एसबी का ब्रेस्टस्ट्रोक स्पर्धाओं के लिए और एसएम का व्यक्तिगत मेडले स्पर्धाओं के लिए किया जाता है।
नंदकुमार भी जीते
भारत के तेजस नंदकुमार ने पुरुष 100 मीटर एस7 तैराकी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। तेजस ने 1:18.58 का समय लिया और वह तीसरे स्थान पर रहे। चीन के जिंगसोंग रुआन ने 1:12.16 का समय लेकर स्वर्ण जीता। ये पैरा एशियन गेम्स का नया रिकॉर्ड भी है। वहीं, सिंगापुर के वेई सोंग तोह ने 1:16.09 का समय लेकर रजत पदक अपने नाम किया।