भारत के शीर्ष पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी पी कश्यप का कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाने का सपना रविवार को पूरा हो गया। 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में कश्यप को पुरुष सिंगल्स में कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था लेकिन इस बार वह सोने से कम कुछ नहीं चाहते थे।
मजबूत इरादों, बेहतरीन तकनीक और शानदार जुझारू खेल से कश्यप आखिरकार स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब हो ही गए। उन्होंने पुरुष सिंगल्स के फाइनल में सिंगापुर के डेरेक वोंग को हराया और भारत को 32 साल के लंबे अंतराल के बाद इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक दिलाया। इस जीत के साथ ही कश्यप कॉमनवेल्थ गेम्स के रिकॉर्डबुक में अपना लिखवाने में कामयाब हो गए।
वहीं महिलाओं में ज्वाला गट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी महिला डबल्स में स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई। ज्वाला और अश्विनी की फाइनल में हार के साथ ही भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स से विदाई भी ले ली। भारत का बैडमिंटन में एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य समेत यह कुल चौथा पदक है।